सिर्फ करोना ही नहीं समय रहते डेंगू से बचाव का भी कर लें इंतजाम

भोपाल। कई जिलों में मानसून की दस्तक के साथ ही मौसमी बीमारियां भी पांव पसारने लगी हैं, ऐसे में डेंगू और जीका वायरस से भी लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि डेंगू का मच्छर साफ पानी में पैदा होता है, जिससे कई बार भयावह स्थिति बन जाती है. देश के कई राज्यों में जीका वायरस को लेकर पहले से ही अलर्ट जारी है, जिसमें मध्यप्रदेश भी शामिल है. ऐसे में समय रहते अगर डेंगू के मच्छर से बचाव कर लिया गया तो बेहतर है. आपको बताते हैं कि इसके लक्षण-बचाव और सावधानी.

ऐसे फैलता है डेंगू

डेंगू बुखार से पीड़ित मरीज के खून में डेंगू वायरस बहुत ज्यादा मात्रा में होता है, जब कोई मच्छर डेंगू के किसी मरीज को काटता है तो वह उस मरीज का खून चूसता है. खून के साथ डेंगू वायरस भी मच्छर के शरीर में चला जाता है. इसके बाद जब डेंगू वायरस वाला वह मच्छर किसी और इंसान को काटता है तो उससे वह वायरस दूसरे इंसान के शरीर में पहुंच जाता है, जिससे वह डेंगू वायरस से पीड़ित हो जाता है.

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प्रतीकात्मक चित्र

डेंगू को ऐसे समझें

डेंगू मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है, ये मच्छर दिन में खासकर सुबह काटते हैं. इन मच्छरों के शरीर पर चीते जैसी धारियां होती हैं, डेंगू बरसात के मौसम और उसके फौरन बाद के महीनों यानी जुलाई से अक्टूबर में सबसे ज्यादा फैलता है क्योंकि इस मौसम में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां होती हैं. वहीं एडीज इजिप्टी मच्छर बहुत ऊंचाई तक नहीं उड़ पाता.

डेंगू: लक्षण जो दिखते हैं
डेंगू मच्छर के काटने के करीब 3-5 दिनों के बाद मरीज में डेंगू बुखार के लक्षण दिखने लगते हैं, शरीर में बीमारी पनपने की मियाद 3 से 10 दिनों की भी हो सकती है.

डेंगू तीने प्रकार का होता है

1. क्लासिकल (साधारण) डेंगू बुखार
2. डेंगू हैमरेजिक बुखार (DHF)
3. डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS)

इन तीनों में से दूसरे और तीसरे तरह का डेंगू सबसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है. साधारण डेंगू बुखार अपने आप ठीक हो जाता है, इससे जान जाने का खतरा भी नहीं होता, अगर किसी को DHF या DSS है. उसका फौरन इलाज शुरू किया जाना जरूरी होता है, अन्यथा जान तक जा सकती है. इसलिए यह पहचानना सबसे जरूरी है कि मरीज को कौन सा डेंगू है, साधारण, DHF है या DSS है.

ये हैं तीनों तरह के डेंगू के लक्षण


साधारण डेंगू बुखार

  • ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार चढ़ना
  • सिर-मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना
  • आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना, जो आंखों को दबाने या हिलाने से और बढ़ जाता है
  • बहुत ज्यादा कमजोरी लगना, भूख न लगना और जी मिचलाना, मुंह का स्वाद खराब होना
  • गले में हल्का-सा दर्द होना
  • शरीर खासकर चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल-गुलाबी रंग के रेशे होना

जानकारों का मानना है कि साधारण डेंगू बुखार करीब 5 से 7 दिन तक रहता है और मरीज ठीक हो जाता है. ज्यादातर मामलों में इसी किस्म का डेंगू बुखार होता है. जानकारों का यह भी कहना है कि डेंगू से कई बार मल्टी ऑर्गन फेल्योर भी हो जाता है. इसमें सेल्स के अंदर मौजूद फ्लूइड बाहर निकल जाता है, पेट के अंदर पानी जमा हो जाता है. लंग्स और लिवर पर बुरा असर पड़ता है और ये काम करना बंद कर देते हैं.

डेंगू और प्लेटलेट्स का संबंध

आमतौर पर तंदुरुस्त आदमी के शरीर में डेढ़ से दो लाख प्लेटलेट्स होते हैं, प्लेटलेट्स बॉडी की ब्लीडिंग रोकने का काम करती है, अगर प्लेटलेट्स एक लाख से कम हो जाएं तो उसकी वजह डेंगू हो सकता है. हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि जिसे डेंगू हो, उसकी प्लेटलेट्स नीचे ही जाएं. प्लेटलेट्स अगर एक लाख से कम हैं तो मरीज को फौरन हॉस्पिटल में भर्ती कराना चाहिए. अगर प्लेटलेट्स गिरकर 20 हजार तक या उससे नीचे पहुंच जाएं तो प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है. 40-50 हजार प्लेटलेट्स तक ब्लीडिंग नहीं होती.

डेंगू का वायरस आमतौर पर प्लेटलेट्स कम कर देता है, जिससे बॉडी में ब्लीडिंग शुरू हो जाती है. अगर प्लेटलेट्स तेजी से गिर रहे हैं. मसलन सुबह एक लाख थे और दोपहर तक 50-60 हजार हो गए तो शाम तक गिरकर 20 हजार पर पहुंच सकते हैं. ऐसे में डॉक्टर प्लेटलेट्स का इंतजाम करने लगते हैं, ताकि जरूरत पड़ते ही मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाए जा सकें. प्लेटलेट्स निकालने में तीन-चार घंटे लगते हैं.

बच्चों को खतरा ज्यादा

चाइल्ड स्पेशलिस्ट के अनुसार बच्चों का इम्युन सिस्टम ज्यादा कमजोर होता है और वे खुले में ज्यादा रहते हैं, इसलिए उनके प्रति सचेत रहने की ज्यादा जरूरत है. पैरेंट्स ध्यान दें कि बच्चे घर से बाहर पूरे कपड़े पहनकर ही जाएं, जहां खेलते हों, वहां आसपास गंदा पानी न जमा हो. बहुत छोटे बच्चों को खुलकर बीमारी के बारे में बता भी नहीं पाते, इसलिए अगर बच्चा बहुत ज्यादा रो रहा हो, लगातार सो रहा हो, बेचैन हो, उसे तेज बुखार हो, शरीर पर रेशे हों, उल्टी हो या इनमें से कोई भी लक्षण हो तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं, बच्चों को डेंगू हो तो उन्हें अस्पताल में रखकर ही इलाज कराना चाहिए क्योंकि बच्चों में प्लेटलेट्स जल्दी गिरते हैं और उनमें डीहाइड्रेशन (पानी की कमी) भी जल्दी होता है.

डॉक्टर को दिखाएं
डेंगू होने पर किसी अच्छे फिजिशियन के पास जाना चाहिए, बच्चों में डेंगू के लक्षण नजर आएं तो उसे पीडिअट्रिशन के पास ले जाएं.

ये है इलाज

  • अगर मरीज को साधारण डेंगू बुखार है तो उसका इलाज व देखभाल घर पर की जा सकती है
  • डॉक्टर की सलाह लेकर पैरासिटामोल (क्रोसिन आदि) ले सकते हैं
  • एस्प्रिन (डिस्प्रिन आदि) बिल्कुल न लें, इनसे प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं
  • अगर बुखार 102 डिग्री फॉरेनहाइट से ज्यादा है तो मरीज के शरीर पर पानी की पट्टियां रखें
  • सामान्य रूप से खाना देना जारी रखें, बुखार की हालत में शरीर को और ज्यादा खाने की जरूरत होती है
  • मरीज को आराम करने दें.
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