इंदौर हाई कोर्ट का फैसला, सुभाष सोजतिया की चुनाव याचिका खारिज, जानें क्या है मामला 

इंदौर हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए गुरुवार को कांग्रेस प्रत्याशी सुभाष सोजतिया की चुनाव याचिका खारिज़ कर दी. गरोठ विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस प्रत्याशी सुभाष सोजतिया द्वारा बीजेपी विधायक देवीलाल धाकड़ के विरुद्ध चुनाव याचिका मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर के समक्ष वर्ष 2018 में गरोठ विधान सभा से चुनाव हारने के बाद चुनाव याचिका प्रस्तुत की गई थी. चुनावों में देवीलाल धाकड़ को 75 हजार 946 वोट मिले थे, वही हारने वाले उम्मीदवार सुभाष सोजतिया को 73 हजार 838 वोट मिले थे. यहां देवीलाल धाकड़ 2108 वोट से जीते थे.

गरोठ विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस प्रत्याशी सुभाष सोजतिया ने बीजेपी विधायक देवीलाल धाकड़ के खिलाफ चुनाव याचिका पेश की थी. साल 2018 में गरोठ चुनाव हारने के बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में ये याचिका दायर की गई. इस आधार पर कि देवीलाल धाकड़ ने अपने नामांकन पत्र में डाईवर्जन शुल्क, सरकारी संपत्ति का बकाया किराया और बचत खातों एवं सावधि खातों पर प्राप्त होने वाले ब्याज को छिपाया है. वहीं, 17 जुलाई 2018 को गरोठ में आयोजित चुनावी आमसभा में धर्म-जाति के आधार पर वोट मांग कर भ्रष्ट आचरण अपनाकर चुनाव जीता है.

सव्यय निरस्त की गई याचिका
हाई कोर्ट ने याचिका में एक भी आरोप याचिकाकर्ता द्वारा सिद्ध नहीं माना औऱ 31 अगस्त 2023 को याचिका सव्यय निरस्त कर दी गई. देवीलाल धाकड़ की ओर से पैरवी एडवोकेट रोहित मंगल एडवोकेट और एडवोकेट सुनील वर्मा ने की.  

दरअसल, सुभाष कुमार सोजतिया द्वारा गरोठ-भानपुरा विधानसभा के विधायक देवीलाल धाकड़ के चुनाव को रद्द करने के लिए चुनाव याचिका उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई थी. याचिका में लिखा गया था कि देवीलाल धाकड़ द्वारा चुनावी हलफनामे में अपनी आय और सरकारी देय छुपाने एवं चुनाव में धर्म के आधार पर वोट मांगे गए जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के अंतर्गत भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है. इन आधारों पर देवीलाल धाकड़ का चुनाव निरस्त करने के लिए सोजतिया ने याचिका लगाई गई थी.

उच्च न्यायालय द्वारा चुनावी सभा की सीडी के समर्थन में दिए गए सर्टिफिकेट को लेने से इंकार किया गया था और याचिककर्ता को नया सर्टिफिकेट लाने का आदेश पारित किया था. इस आदेश के विरुद्ध सुभाष कुमार सोजतिया द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता रविन्द्र सिंह छाबड़ा और अधिवक्ता मुदित माहेश्वरी के माध्यम से याचिका प्रस्तुत की गई थी जिसमें सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तहसीलदार गरोठ को नए सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने का आदेश दिया, साथ ही उच्च न्यायालय को चुनाव याचिका का जल्द निराकरण करने हेतु आदेशित किया था.

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