इंदौर में बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज ने सत्ता और संगठन को हिला दिया है। इस मसले पर राज्य सरकार तत्काल सक्रिय हुई और थाना प्रभारी संजय बैस को हटा दिया गया है। दोपहर बाद जोन क्रमांक तीन के डीसीपी धर्मेंद्र भदौरिया को भी हटा दिया। एडीजी स्तर के अधिकारी से जांच कराने के आदेश जारी किए गए हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज को बर्बरतापूर्ण बताया और कहा है कि दोषी अधिकारी नहीं बचेंगे। उन पर कार्रवाई होगी।
इंदौर में बढ़ते नाइट कल्चर और नशाखोरी के खिलाफ बजरंग दल ने गुरुवार को प्रदर्शन किया। इसकी पूर्व सूचना दी गई थी। इसके बाद भी बड़े अधिकारी नहीं पहुंचे और बजरंगियों की भीड़ बढ़ती चली गई। चक्काजाम कर दिया गया। जब हालात बेकाबू हो गए तो पुलिस ने लाठीचार्ज किया। कई कार्यकर्ता घायल भी हुए। 15 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। यह मामला भोपाल पहुंचते ही सियासत गरमा गई। कांग्रेस तक ने कार्रवाई पर सवाल उठाए। इस पर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने शुक्रवार को कहा कि गुरुवार शाम को मामला संज्ञान में आ गया था। इस मामले में वैधानिक कार्रवाई की गई है। भोपाल से जाकर एडीजी स्तर के अधिकारी जांच करेंगे। इंचार्ज टीआई को लाइन-अटैच कर दिया गया है। सुबह 15 कार्यकर्ताओं को भी छोड़ दिया गया, जिन्हें गुरुवार को हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने इस मामले में 250 से ज्यादा बजरंग दल कार्यकर्ताअेां पर धारा 147 के तहत बलवा और शासकीय काम में बाधा डालने का केस दर्ज किया है।
शर्मा बोले- नहीं बचेंगे दोषी अधिकारी
बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज से भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारी नाराज हैं। इसी वजह से सरकार को तत्काल सक्रियता दिखानी पड़ी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज के मामले में मेरी वहां बातचीत हुई है। हम पूरी जानकारी लेने का प्रयास कर रहे हैं। हमारे बजरंग दल के कार्यकर्ता कुछ मांगों के साथ आंदोलन कर रहे थे। उनके ऊपर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज हुआ है। ऐसे में जो भी दोषी अधिकारी होंगे, उनमें से कोई नहीं बचेगा।
क्या है मामला
बजरंग दल ने इंदौर के नाइट कल्चर और नशाखोरी को लेकर प्रदर्शन की सूचना दी थी। इसे देखते हुए तीन थाना प्रभारियों समेत बड़ी संख्या में पुलिस बल को पलासिया पर तैनात किया गया था। 500 से अधिक बजरंग दल कार्यकर्ता ज्ञापन देने आए थे। वह कमिश्नर मकरंद देउस्कर को ज्ञापन देना चाहते थे। इसी मांग को लेकर अड़े रहे। गहमागहमी बढ़ी तो उन्होंने सड़क पर चक्काजाम करना शुरू कर दिया। इससे अफरा-तफरी की स्थिति बनी। पुलिस को ट्रैफिक सुचारू रूप से चलाने के लिए बजरंग दल के कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज करना पड़ा। इससे हालात और बिगड़ गए।









