नृपेन्द्र मिश्र को क्यों हटाया गया?

 प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव के पद से नृपेन्द्र मिश्रा के अचानक इस्तीफा देने से दिल्ली में राजनीतिक विश्लेषक और नौकरशाह हैरान हैं। किसी को भी यह बात हज्म नहीं हो रही कि इस दिग्गज नौकरशाह ने अपनी मर्जी से इस्तीफा दिया है।नृपेन्द्र मिश्र को त्यागपत्र दिए एक सप्ताह हो चुका है लेकिन इसको लेकर असमंजस बरकरार है।

इस मामले में इसलिए भी हैरानी हो रही है क्योंकि इस दिग्गज नौकरशाह को जुलाई के अंत में ही 2ए कृष्णा मैनन मार्ग बंगला अलॉट किया गया था जिसे पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने खाली किया था। यहां तक कि बंगले में रैनोवेशन का कार्य भी जोर-शोर से चल रहा था। हालांकि जब जेतली ने 4 साल पहले इस बंगले में प्रवेश किया था तो इसका पूरी तरह नवीकरण करवाया गया था।


नृपेन्द्र मिश्र को गत जून में कैबिनेट रैंक पर पदोन्नत किया गया था और इसलिए उन्हें उसी रैंक के हिसाब से बंगला मिलना था इसलिए उन्होंने वर्तमान अब्दुल कलाम रोड बंगले से 2ए कृष्णा मैनन मार्ग बंगले में शिफ्ट होने का फैसला लिया। बंगले में मुरम्मत कार्य जोर-शोर से चलना इस बात का संकेत है कि उनका पी.एम.ओ. और दिल्ली में रुकने का पूरा इरादा था। फिलहाल उनका रिटायर होने का कोई इरादा नहीं था।लेकिन अचानक नृपेन्द्र मिश्र ने त्यागपत्र देने का फैसला लिया और प्रधानमंत्री ने भी इसे तुरन्त स्वीकार कर लिया। प्रधानमंत्री ने उसी दिन कार्यकाल समाप्त करने वाले कैबिनेट सचिव पी.के. सिन्हा को अपने कार्यालय में ओ.एस.डी. के तौर पर नियुक्त कर लिया। इससे पहले ऐसी खबरें थीं कि सिन्हा को या तो नीति आयोग भेजा जाएगा या फिर सी.वी.सी. बनाया जाएगा।


पी.एम.ओ. से मिश्र की विदाई एक बड़ी घटना है क्योंकि जुलाई 2014 से वह पी.एम.ओ. में सारा कामकाज देख रहे थे। यहां तक कि जून 2014 में उन्हें प्रधान सचिव बनाने के लिए प्रधानमंत्री ने अध्यादेश लाकर कानून में संशोधन भी किया था। मिश्र की तरक्की विवेकानंद रिसर्च फाऊंडेशन से जुडऩे के बाद हुई थी जहां उन्होंने अजीत डोभाल के साथ काम किया था।


दरअसल पहले अजीत डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के तौर पर पी.एम.ओ. में लाया गया था और उसके बाद आए थे नृपेंद्र मिश्र। नृपेंद्र मिश्र अर्थव्यवस्था और आधारभूत ढांचा क्षेत्र को देख रहे थे जबकि अतिरिक्त प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा सरकार में ट्रांसफर, पोसिं्टग और नियुक्तियों के मामले देख रहे थे। 2018 के अंत में पी.एम.ओ. से ये खबरें आनी शुरू हुईं कि नृपेन्द्र मिश्र रिटायर हो जाएंगे और पी.के. मिश्रा को पदोन्नत किया जाएगा। इसके विपरीत वरिष्ठ मिश्रा को मोदी के दूसरे कार्यकाल में कैबिनेट रैंक के साथ दोबारा नियुक्त किया गया।


सूत्रों का कहना है कि नृपेन्द्र मिश्र की विदायगी के तार कहीं न कहीं अर्थव्यवस्था की खराब स्थिति से जुड़े हुए हैं। उनकी पसंद के अधिकारी एस.सी. गर्ग को वित्त सचिव के पद से हटाने, सॉवरेन बांड्स विवाद तथा 5 जुलाई को केन्द्रीय बजट के परिणाम से सरकार परेशान थी। अब ऐसी खबरें हैं कि नृपेन्द्र मिश्र को किसी राज्य का राज्यपाल बनाया जा सकता है। गोवा में मृदुला सिन्हा और कर्नाटक में वज्जूभाई वाला का 5 साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है। इसके अलावा जगदीश मुखी ने मिजोरम का दोहरा कार्यभार संभाला हुआ है।

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