इंदौर।
लगातार चार बार से देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीत रहे इंदौर को केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने देश का पहला वाटर प्लस शहर घोषित किया है। बुधवार को इसकी घोषणा की गई। इंदौर नगर निगम ने वाटर प्लस सर्टिफिकेट के लिए शहर की कान्ह और सरस्वती नदियों के अलावा उनसे जुड़े छोटे-बड़े नालों में गंदे पानी को मिलने से रोककर उसे लाइन के जरिये सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक पहुंचाने की व्यवस्था की थी। उपचार के बाद पानी का अलग-अलग कार्यों में दोबारा उपयोग भी किया जा रहा था। पिछले दो साल सेे नगर निगम वाटर प्लस सर्टिफिकेट पाने के प्रयास कर रहा था।
निगम अधिकारियों का कहना है कि देश के करीब 250 शहरों ने वाटर प्लस सर्टिफिकेट के लिए दावा पेश किया है और डेेस्कटॉप असेसमेंट (दस्तावेेजों की जांच) में 70 शहरों को मंत्रालय ने इस सर्टिफिकेट के लायक माना है। इंदौर पहला शहर है, जिसने यह सर्टिफिकेट हासिल किया है। इंदौर को सूरत से कड़ी टक्कर मिल रही थी, लेकिन बाजी इंदौर ने मारी। माना जा रहा है कि दूसरा सर्टिफिकेट सूरत को मिल सकता है। इसके अलावा नई दिल्ली म्युनिसिपल कार्पोरेशन और नवी मुंबई जैसे शहर भी वाटर प्लस सर्टिफिकेट की दौड़ में हैं।
यह है वाटर प्लस सर्वे (सर्टिफिकेट)
स्वच्छ भारत अभियान में माइक्रो लेवल पर जाने के लिए मंत्रालय ने सफाई के साथ वाटर प्लस को शामिल किया है। इसका मकसद शहरों में जलाशयों, नदियों और तालाबों को साफ करना है। मंत्रालय चाहता है कि नदी-नालों में केवल साफ और बरसाती पानी ही बहे और सीवरेज के पानी का दोबारा उपयोग होता रहे।
वाटर प्लस सर्वे में पानी काला नहीं दिखना चाहिए। इंदौर में कान्ह-सरस्वती नदियां और उनसेे जुड़े 25 छोटे-बड़े नालेे इस गंदे पानी के सबसे बड़े वाहक थे। इनमें मिलने वाले सार्वजनिक और घरेलू आउटफाल बंद करने में कामयाबी पाई।
नदी-नालों में मिलने वाले पानी को पाइप लाइन के माध्यम से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक लाया गया, जहां उसेे उपचारित कर विभिन्ना कार्यों में उसका पुनरुपयोग होनेे लगा।
वाटर प्लस के लिए किसी भी शहर को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) होना जरूरी है। इंदौर यह उपलब्धि पहले ही हासिल कर चुका है।
उल्लेखनीय है कि इंदौर देश के स्वच्छ शहर का खिताब चार बार हासिल कर चुका है। स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत इंदौर में पिछले दिनों वाटर प्लस सर्वे किया गया था। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की सर्वे टीम ने वाटर प्लस के मानकों के हिसाब से शहर की सुविधाओं को परखा था । इसके साथ-साथ शहर में ओडीएफ डबल प्लस का सर्वे भी किया गया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, गृहमंत्री और इंदौर के प्रभारी डॉ नरोत्तम मिश्रा और कांग्रेस नेता कमल नाथ ने इस उपलब्धि पर बधाई दी है।
इस दौरान नदी-नालों में जहां भी गंदा पानी आ रहा है उसे रोकने की कवायद की गई थी। उल्लेखनीय है कि 6000 अंकों के स्वच्छ सर्वे में वाटर प्लस के 700 नंबर थे। सेवन स्टार रेटिंग पाने के लिए किसी भी शहर को वाटर प्लस सर्वे प्रमाण पत्र जरूरी है। इसी सर्वे के लिए नगर निगम ने इंदौर की कान्ह और सरस्वती नदियों के साथ उनसे जुड़े छह नालों की सफाई कर उनमें मिलने वाले घरेलू गंदे पानी की आवक रोकी है।
अधिकारियों के अनुसार इंदौर के लिए यह सर्वे प्रतिष्ठापूर्ण रहा, क्योंकि इंदौर शहर का दावा सबसे मजबूत था।सर्वे टीम ने खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) डबल प्लस का सर्वे भी किया। इसमें शहर के शौचालयों और यूरिनल की जांच की गई। इसमें देखा गया कि सभी शौचालयों और यूरिनल में फ्लश, हाथ धोने, लाइट और मानक स्तर की अन्य सुविधाएं हैं या नहीं।
सर्वे में वाटर प्लस के साथ ओडीएफ प्लस प्लस के 1100 नंबर थे। सर्वे टीम शहर के नदी-नालों की स्थिति को भी कसौटी पर परखा गया। इंदौर शहर में स्वच्छ और सेवन स्टार का सर्वे तो लाकडाउन के पहले हो चुका था, लेकिन वाटर प्लस और ओडीएफ प्लस प्लस सर्वे नहीं हो पाया था।









