भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पृथ्वी की निगरानी करने वाले उपग्रह ‘ईओएस-03’ की लॉन्चिंग फेल हो गई। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपण के बाद सैटेलाइट ने दो चरण सफलता पूर्वक पूरे किए, लेकिन 18 मिनट के बाद क्रायोजेनिक इंजन में तकनीकी गड़बड़ी आ गई। इसके बाद मिशन के आंशिक रूप से फेल होने की सूचना दे दी गई।
श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से इस अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को सुबह 5:43 बजे प्रक्षेपित किया गया था। इसके बाद सारे स्टेज सही समय पर अलग होते चले गए, लेकिन क्रोयोजेनिक इंजन के आंकड़े मिलने बंद हो गए। इसकी जांच करने के बाद पूरे मामले की जानकारी इसरो चीफ डॉ के सिवन को दी गई जो मिशन कंट्रोल सेंटर में बैठे थे।
GSLV (भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान)-F10 के जरिए EOS-3 की लॉन्चिंग के बाद पूरी यात्रा 18.39 मिनट की थी। यह सैटेलाइट 10 साल तक सेवाएं देता। यह उपग्रह कृषि, वानिकी, जल निकायों के साथ-साथ आपदा चेतावनी, चक्रवात निगरानी, बादल फटने या आंधी-तूफान की निगरानी सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रयोग लाने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी देता।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (ईओएस) की मुख्य विशेषता यह है कि यह चिन्हित किये गए किसी बड़े क्षेत्र क्षेत्र की वास्तविक समय की छवियां लगातार अंतराल पर भेजता रहेगा। उन्होंने कहा कि यह प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ किसी भी तरह की अल्पकालिक घटनाओं की त्वरित निगरानी में मदद करेगा।









