कोरोना संक्रमित पिता की जगह कोविड सेंटर में लोगों की सेवा करते रहे

इंदौर:इंदौर के IAS अफसर ने इस कोरोना काल में अनूठी मिसाल पेश की है। खंडवा रोड स्थित राधा स्वामी सत्संग न्यास का उन्हें प्रभार मिला हुआ है। अपने परिवार से ज्यादा वह इस अस्थाई कोविड-19 इंटर में रहते हैं और अपना कार्य बड़ी शिद्दत से निभा रहे है।

एसडीएम विवेक श्रोत्रिय वर्तमान में खंडवा रोड स्थित राधा स्वामी सत्संग न्यास के नोडल अधिकारी है। कोरोना संक्रिमत उनके पिता प्रभुदयाल श्रोत्रिय को ग्वालियर में तबीयत बिगड़ने के बाद 19 अप्रैल को इंदौर के वेदांता हॉस्पिटल दाखिल किया गया था। ICU में दाखिल पिता की हालत बिगड़ी,ऑक्सीजन लेवल 95 से घटकर 75-80 तक पहुंच गया। प्लाजमा चढ़ाने के लिए अरविंदो अस्पताल में दाखिल करना पड़ा। लेकिन वह उनके पिता को बचा ना सके और सोमवार उनके पिता का निधन हो गया।

लेकिन श्रोत्रिय के लिए संभव नहीं था कि पूरे वक्त वहां रहते, भानेज दामाद डॉ संदेश सहित दोनों अस्पतालों के डॉक्टरों की टीम पर भरोसा था। दिन में जब भी वक्त मिलता कोविड मरीजों वाले ICU में दाखिल पिता जब तक बोलने-सुनने की स्थिति में रहे उनका हौंसला बढ़ाते और समझाते कि आपकी हालत तो ठीक है। सैकड़ों लोगों को तो बेड तक नहीं मिल पा रहे हैं। उन्हें बताते कि मुझे जिस कोविड सेंटर का काम मिला है वहां कैसे काम हो रहा है।

स्वर्गीय प्रभुदयाल श्रोत्रिय

विवके श्रोत्रिय कोरोना गाइडलाइन के पालन के अंतर्गत सोमवार की सुबह जीएसआईटीएस के कॉलेज के जमाने के कुछ दोस्तों, कलेक्टर और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी आदि की मौजूदगी में सुबह विजय नगर मुक्तिधाम पर पिता को अंतिम विदाई देकर फिर कोविड सेंटर में दाखिल मरीजों की देखभाल में जुट गए।

पिता को दे पाते थे 15 मिनिट

पिता खुश थे। बेटे की मेहनत से इंदौर विकास प्राधिकरण सीईओ श्रोत्रिय पर कलेक्टर ने भरोसा कर काम सौंप ही रखा था। इस अवधि में सेवा करते और बाद में राधास्वामी न्यास वाली जमीन पर बनाए गए कोविड सेंटर को 600 बेड से बढ़ाकर दूसरे चरण में 600 बेड और बढ़ाने संबंधी कलेक्टर के निर्देश का पालन करने में जुटे रहते।

​​​​​ विवेक श्रोत्रिय नोडल अधिकारी को कलेक्टर से लेकर अन्य सहयोगी अधिकारी कहते रहे कि तुम पिताजी की देखभाल कर लो, लेकिन उनका जवाब रहता था मैं जितना वक्त देता हूं उसमें प्रार्थना की अपेक्षा सेवा करना बेहतर लगता है। पीपीई किट कैसे पहने यह पता नहीं था। गहन चिकित्सा इकाई में दाखिल पिता की खैरियत जानने के लिए पीपीई किट पहन कर जाते थे। लेकिन वह अपने पिता को बचा न सके।

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