
धार जिले के विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मांडू में आयोजित एशियाई सम्मेलन में भाग लेने के लिए बुधवार को 16 देशों और 13 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से करीब 200 विदेशी प्रतिनिधि पहुंचे। उनका परंपरागत भारतीय अंदाज में भव्य स्वागत किया गया। धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के नेतृत्व में जिले के आला अधिकारियों ने तिलक लगाकर और फूल मालाएं पहनाकर सभी मेहमानों का स्वागत किया।
जामा मस्जिद का भ्रमण और आदिवासी नृत्य
शाम करीब 4:30 बजे विदेशी प्रतिनिधियों का पहला पड़ाव मांडू की ऐतिहासिक जामा मस्जिद रहा। यहां आदिवासी नृत्य दलों ने मादल की थाप पर पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत करते हुए उनका स्वागत किया। प्रतिनिधियों ने जामा मस्जिद के ऐतिहासिक महत्व को जाना और इसकी भव्यता को सराहा। कई मेहमानों ने मस्जिद के अंदर सेल्फी लेकर इस ऐतिहासिक स्थल को कैमरे में कैद किया।

जहाज महल का दौरा और पारंपरिक भोजन
इसके बाद विदेशी मेहमान जहाज महल के दौरे पर रवाना हुए, जहां उन्होंने इस प्रसिद्ध धरोहर की वास्तुकला और इतिहास को नजदीक से देखा। सम्मेलन के विशेष आयोजन में मेहमानों के लिए पारंपरिक भारतीय भोजन, जिसमें मक्का, ज्वार, बाजरे की रोटी शामिल थी, के साथ यूरोपीय व्यंजनों की भी व्यवस्था की गई।

लाइट एंड साउंड शो के जरिए इतिहास से परिचय
शाम को मेहमानों ने लाइट एंड साउंड शो के जरिए मांडू के समृद्ध इतिहास और इसकी विरासत को समझा। यह प्रस्तुति मांडू के गौरवशाली अतीत और स्थापत्य कला पर आधारित थी, जिसने विदेशी मेहमानों को प्रभावित किया।

रात्रि में इंदौर के लिए रवाना
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद विदेशी प्रतिनिधि रात 9 बजे मांडू से इंदौर के लिए रवाना हो गए। यह सम्मेलन भारत की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने और विदेशी मेहमानों को भारतीय परंपरा व इतिहास से परिचित कराने का एक अनूठा प्रयास साबित हुआ।
