एक थी सरस्वती, एक अजन्मा बच्चा और एक संवेदनाहीन सिस्टम

भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में गायनिक विभाग की तीसरे वर्ष की छात्रा बाला सरस्वती ने सोमवार की सुबह आत्महत्या कर ली। सरस्वती भोपाल के कोहेफिजा में एक फ्लैट में अपने पति के साथ रहती थी और गर्भवती थी। मौत के पहले अपनी दोस्त को किए एक व्हाट्सएप में उसने अपनी मौत का जिम्मेदार गांधी मेडिकल कॉलेज के सिस्टम को बताया। वही उसके परिजनों ने कॉलेज की पूर्व डीन और वर्तमान में गायनिक विभाग की प्रमुख डॉ अरुणा कुमार सहित पांच अन्य डॉक्टरों को इस आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया।

यह है मामला
आंध्र प्रदेश की रहने वाली सरस्वती के परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है। इस बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए परिजनों ने परिश्रम किया और अपने सपने को पूरा करने के लिए जिंदगी दांव पर लगा दी,वह अब इस दुनिया में नहीं है। लेकिन इससे भी दुखद बात यह है कि मौत के जिम्मेदार पर कार्रवाई करने के नाम पर पूरा सिस्टम चुप बैठा है। 27 साल की सरस्वती अब इस दुनिया में नहीं है और उसके साथ ही सुपुर्द ए खाक हो गया है इस दुनिया में नहीं आ पाया उसका अजन्मा शिशु भी। सरस्वती का अपनी मित्र को किया गया वाट्सएप मैसेज इस मौत के लिए कॉलेज प्रबंधन को ही जिम्मेदार ठहरा रहा है। उसके परिजन साफ तौर पर गायनिक विभाग की प्रमुख डॉ अरुण कुमार सहित प्रोफेसर रेखा वाधवानी,एसोसिएट प्रोफेसर पल्लवी सिंह ,असिस्टेंट प्रोफेसर पूर्वा बड़कुल, असिस्टेंट प्रोफेसर नंदिनी सिंह को भी सरस्वती को लगातार दी जा रही प्रताड़ना के बारे में बता रहे हैं। लेकिन पुलिस है कि उसे जांच के लिए समय चाहिए। छोटी-छोटी बातों पर आरोप-प्रत्यारोपों के बयान देने वाले सत्ताधारी राजनेताओं ने अपने मुंह सी लिए हैं। इस तरह की घटनाओं पर अपनी कर्कश आवाज के साथ कार्रवाई करने वाला बुलडोजर एक कोने में चुपचाप खड़ा है क्योंकि सरस्वती का खैर ख्वाह कोई नहीं। परिजनों का क्या, रो-रोकर चिल्लाकर चुप हो जाएंगे, भले ही जिंदगी भर यह जख्म अब उनके लिए नासूर बन गया हो, लेकिन जिस सिस्टम ने गांधी मेडिकल कॉलेज पर कब्जा कर रखा है, उसके रसूख के आगे सब नतमस्तक हो गए हैं। कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र- छात्राएं अपना भविष्य खराब होने की आशंका के चलते मौन है। शायद उस कहानी को भूलकर ,जिसमें शेर बारी बारी से एक-एक कर खरगोशों को खा जाता है,और अंत में कोई बचा नहीं रहता। डॉक्टरों के वह तमाम संगठन भी यह सोच कर चुप्पी साधे हैं कि आखिर एक छात्रा ही तो मरी है, एक प्रभावी पूर्व डीन और वर्तमान प्रोफेसरों से पंगा कौन ले। धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों को शायद यह तनिक भी ख्याल नहींकि वर्षों की मेहनत से लगभग तैयार हो चुका एक और भगवान उनके बीच से चला गया है।

कोहेफिजा में रहने वाली सरस्वती और उसका पति जयवर्धन चौधरी
सरस्वती जहां गांधी मेडिकल कॉलेज में गायनिक विभाग में तीसरे वर्ष की छात्रा थी वही जयवर्धन सिविल सेवा की तैयारी कर रहे थे। हंसती मुस्कुराती जिंदगी, जिसने न जाने कितने अनगिनत सपने भविष्य के संजों रखे थे,न जाने किसकी नजर लग गई। सोमवार की सुबह जब जयवर्धन ने अपनी पत्नी को अपने पास नहीं देखा तो वे उठकर दूसरे कमरे में गए जहां सरस्वती बेसुध पड़ी हुई थी और उसका चेहरा नीला पङा हुआ था। दरअसल सरस्वती ने एनेस्थीसिया में प्रयोग होने वाले इंजेक्शन का ओवरडोज ले लिया था जिसके कारण उसकी मौत हो गई। मौत के बाद जो कारण सामने आए उसमें सीधे तौर पर कॉलेज प्रबंधन के द्वारा दी जा रही प्रताड़ना ही जवाबदेह थी। सरस्वती ने अपनी मित्र को व्हाट्सएप किया और उसने कहा कि उसे कामचोर कहा जाता था और वह कॉलेज के इस जहरीले माहौल में अब नहीं रह सकती। सरस्वती के परिजनों ने भी सरस्वती को प्रताड़ित करने के लिए सीधे तौर पर डॉ अरुणा कुमार को जिम्मेदार ठहराया जो गायनिक विभाग की प्रमुख है और कॉलेज की डीन भी रह चुकी है।इसके साथ ही प्रोफेसर रेखा वाधवानी,एसोसिएट प्रोफेसर पल्लवी सिंह ,असिस्टेंट प्रोफेसर पूर्वा बड़कुल, असिस्टेंट प्रोफेसर नंदिनी सिंह के ऊपर भी आरोप लगाए गए। लेकिन पुलिस सिर्फ जांच कर कार्रवाई करने की बात करती रही।इतना ही नहीं, कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने भी कॉलेज प्रबंधन की प्रताड़ना के बारे में शिकायत की लेकिन किसी के कानों पर जूं नहीं रेगीं।

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