इंदौर स्वच्छता में नंबर वन है, लेकिन हरियाली में हम कई शहरों से पीछे है। शहर के क्षेत्रफल का सिर्फ 9 प्रतिशत हिस्सा ही हरा भरा है, जबकि दिल्ली में 19 और सूरत में 25 प्रतिशत ग्रीनबेल्ट है। सूरत ने 20 सालों में ग्रीन बेल्ट को दोगुना किया है। अब नगर निगम भी चार साल में इंदौर का ग्रीन बेल्ट 18 प्रतिशत तक करना चाहता है। इसके लिए हर साल बड़े पैमाने पर पौधे लगाए जाएंगे।
मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि शहर की सुंदरता के लिए हरियाली भी होना आवश्यक है। हम पौधारोपण को भी जन आंदोलन की तरह लेंगे। 17 जुलाई को हरियाली अमावस्या पर शहर में एक लाख पौधे लगाए जाएंगे। इसमें हम रहवासी संगठन, सामाजिक, धार्मिक संस्थाअेां की मदद भी लेंगे। इस दिन ट्रेंचिंग ग्राउंड, बिचौली हप्सी सिटी फारेस्ट, बिजासन टेेकरी, भागीरथपुरा, चोइथराम नदी किनारे,पिपल्याहाना तालाब, सिरपुर तालाब और विदूर नगर में पौधारोपण करेंगे। हम चार सालों में हरियाली का प्रतिशत 18 तक करना चाहते है।
मेयर ने कहा कि इस अभियान के तहत पांच पौधे लगाने का चैलेंज भी वे शहर के गणमान्य नागरिकों को दे रहे है, ताकि उसे स्वीकार कर ज्यादा से ज्यादा लोग वृक्षारोपण करें। 17 जुलाई को होने वाले पौधारोपण के लिए कई संस्थानों ने पौधे नगर निगम को उपलब्ध कराए है।
मास्टर प्लान में 14 प्रतिशत ग्रीन बेल्ट दर्शाया लेकिन उसमें अवैध बसाहट
इंदौर के मास्टर प्लान में ग्रीन बेल्ट को 14 प्रतिशत हिस्से में दर्शाया गया है, लेकिन हकीकत में 9 प्रतिशत है,क्योकि पिपल्यापाला, प्रजापत नगर, द्वारकापुरी, कैलोत करताल, खंडवा रोड सहित ग्रीन बेल्ट के कई हिस्सों मेें अवैध काॅलोनियां बस गई है, लेकिन उन्हें ग्रीन बेल्ट में ही दिखाया गया।









