इंदौर के व्यापारियों ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोला, कमिश्नर-कलेक्टर ने नाम पूछे तो कहा, आप ही पता करें, हमें सुरक्षित व्यापार करने दें

फूड मामले में कार्रवाई का अधिकार खाद्य विभाग को है लेकिन पुलिसकर्मी चाहे जब आकर परेशान करते हैं। वे व्यापारियों को बिना नोटिस दिए थाने बुलाकर दिनभर थाने पर रखते हैं। उन्हें धमकाते हैं, धौंस-डपट करते हैं, वसूली करते हैं। आखिर यह क्या है? हम किसी भी मिलावटखोर व्यापारी का समर्थन नहीं करते। एसोसिएशन ने ऐसे व्यापारियों को पहले ही बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

यह बात सियागंज किराना-ड्राय फ्रूट्स एसोसिएशन की ओर से अध्यक्ष रमेश खण्डेलवाल ने रविवार को रेसीडेंसी में कमिश्नर डॉ. पवन कुमार शर्मा, कलेक्टर मनीष सिंह व एसीपी मनीष कपूरिया द्वारा आयोजित बैठक में कही। उन्होंने व्यापारियों का पक्ष रखते हुए कहा कि हम लोग जीएसटी सहित सभी टैक्स चुकाकर लगातार सहयोग करते हैं लेकिन सैंपल व मिलावट के नाम पुलिसकर्मी आए दिन परेशान करते हैं। इससे सारे व्यापारी त्रस्त हैं। फूड डिपार्टमेंट के अधिकारियों का रवैया भी ठीक नहीं है। वे सैंपलिंग के नाम परेशान करते हैं।

कलेक्टर ने कहा फूड इंस्पेक्टर मनीष स्वामी सहित अन्य पर की है कार्रवाई

इस पर कलेक्टर ने कहा कि इस मामले में फूड इंस्पेक्टर मनीष स्वामी सहित अन्य के खिलाफ पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है। जिन भी फूड इंस्पेक्टर के खिलाफ शिकायत मिलती है तो जांच के बाद उन पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। कुछ पुलिसकर्मी, फूड डिपार्टमेंट के कुछ लोग अभी भी हो सकते हैं लेकिन पूरे महकमा ऐसा नहीं है। व्यापारियों के खिलाफ भी मिलावट के मामले हुए हैं।

अधिकारी तो चले जाएंगे, हमारी सुरक्षा कौन करेगा

एसीपी मनीष कपूरिया ने कहा कि जब तक व्यापारी लिखित शिकायत नहीं करेगा तब कैसे कार्रवाई की जाए। इस पर खण्डेलवाल ने कहा कि हर व्यापारी डरता है। पुलिस से बैर लेकर वह कैसे व्यापार कर सकता है। अधिकारी कुछ साल रहते हैं और चले जाते हैं। व्यापारियों को तो यहीं व्यापार करना है। ऐसे में हमारी सुरक्षा कौन करेगा।

व्यापारियों ने कभी नामजद कार्रवाई नहीं की

कलेक्टर ने कहा कि पहले भी ऐसी स्थिति बनी है। आज तक किसी व्यापारी ने शिकायत नहीं की लेकिन फिर भी समय-समय पर कार्रवाई की गई है। खण्डेलवाल ने कहा कि यह किसी कानून में नहीं कि पुलिस सीधे किसी दुकान पर कार्रवाई के लिए पहुंच जाए। यह काम फूड डिपार्टमेंट का है। अगर पुलिस के पाास किसी व्यापारी के खिलाफ मिलावट को लेकर शिकायत है तो वह वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराने के साथ फूड डिपार्टमेंट से समन्वय करे। फिर फूड विभाग कार्रवाई करें वह भी पूरी जानकारी सही होने पर। अभी पुलिसकर्मी या क्राइम ब्रांच के नाम से पुलिसकर्मी आकर धमकाते हैं।

एक दुकान से 20 सैंपल लेना अराजकता, व्यापारी को बदनाम कर देते हैं

इंदौर घी एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद बेडिया ने कहा कि फूड डिपार्टमेंट टारगेट के नाम एक-एक दुकान से 15-20 सैंपल लेते हैं और व्यापारी को ऐसे दुष्प्रचारित करते हैं जैसे सैंपल में मिलावटखोरी की पुष्टि हो गई है। मीडिया के माध्यम से हमारी छवि खराब की जाती है। जब तक सैंपल की रिपोर्ट नहीं आए तब तक व्यापारी दोषी कैसे हो सकता है। टारगेट के नाम इतने सैंपल लेना अराजकता है।

पुलिस को शिकायत मिलती है तो वरिष्ठ अधिकारी के संज्ञान में लाएं

बैठक में इस विसंगति को लेकर भी बात उठी कि गृह मंत्रालय द्वारा टारगेट को लेकर भी पुलिस पर दबाव है जबकि यह काम फूड डिपार्टमेंट का है। कलेक्टर ने कहा कि इसके लिए एक सिस्टम होगा कि पुलिस को अगर किसी व्यापारी के बारे में मिलावट को लेकर कोई सूचना मिलती है तो वह एडिशनल स्तर के अधिकारी को मामले से अवगत कराए। इसके बाद उक्त अधिकारी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी से समन्वय कर स्थिति समझे। इसके बाद फूड डिपार्टमेंट का स्टाफ पुलिस का सहयोग लेकर मौके पर जाएं। एक व्यापारी के पास से टारगेट के नाम 15-20 सैंपल लेना भी गलत है।

व्यापारी भयमुक्त होकर व्यापार करें

मामले में कमिश्नर डॉ. शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री खुद इस मामले में गंभीर है और कल उन्होंने इस मामले को प्रमुुखता से लिया है। व्यापारी भयमुक्त होकर व्यापार करें। अब कोई भी कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में लेकर होगी। सरकार की प्रतिबद्धता है कि व्यापारियों को सहयोग करें। हमें इस मामले में पहले किसी ने शिकायत नहीं की। व्यापारियों को डरने की जरूरत नहीं है। पुलिस-प्रशासन उनके साथ है। बैठक में अधिकारियों के आश्वासन के बाद व्यापारियों ने जोरदार तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। बैठक में सियागंज, महारानी रोड, रानीपुरा, वेयर हॉउस रोड आदि क्षेत्र के करीब सौ व्यापारी शामिल थे।

हाल ही में इन फूड इंस्पेक्टर्स के खिलाफ हुई थी कार्रवाई

फूड डिपार्टमेंट के अधिकारियों व कर्मचारियों को लेकर पहले भी शिकायतें मिलती रही है। कुछ समय पहले कलेक्टर मनीष सिंह ने फूड इंस्पेक्टर मनीष स्वामी को सस्पेंड कर दिया था। ऐसे ही पिछले माह फूड इंस्पेक्टर व नमूना सहायक सुधाकर बनसिंघे का रिश्वत लेने के कुछ वीडियो वायरल हुए थे। इसे संज्ञान में लेते हुए एडीएम अभय बेड़ेकर ने इन दोनों को सस्पेंड कर दिया था। उधर, व्यापारियों के खिलाफ भी मिलावटी हींग, शहद आदि के मामले सामने आ चुके हैं।

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