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प्रयागराज। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। प्रधानमंत्री के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव मौर्य और ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे। संगम नगरी पहुंचते ही पीएम मोदी ने हाथ हिलाकर जनता का अभिवादन किया। सीएम योगी और दोनों डिप्टी सीएम ने उनका जोरदार स्वागत किया। 54 दिन में PM का महाकुंभ का दूसरा दौरा है। इससे पहले वे 13 दिसंबर को यहां आए थे। प्रधानमंत्री के दौरे के मद्देनजर मेला क्षेत्रा की सुरक्षा पहले से और ज्यादा टाइट की गई है। संगम क्षेत्र में बड़ी संख्या में पैरामिलिट्री फोर्स तैनात किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह 10:05 बजे प्रयागराज एयरपोर्ट पहुंचे। जहां से वे सीधे अरैल घाट के लिए रवाना हुए और सुबह 10:45 बजे वहां पहुंच गए है। नाव के जरिए पीएम मोदी संगम नोज पहुंचे और सुबह 11 बजे उन्होंने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। गंगा स्नान के बाद प्रधानमंत्री सेक्टर 6 में बनाए गए स्टेट पवेलियन का अवलोकन करने के लिए रवाना हो गया है। यहां से वे नेत्र कुंभ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जाएंगे।
45 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद
महाकुंभ में इस बार 45 करोड़ श्रद्धालुओं के पवित्र संगम में स्नान करने का अनुमान है। हर 12 साल बाद लगने वाले इस कुंभ में 144 साल बाद खास संयोग बन रहा है, क्योंकि अब तक 12 कुंभ पूरे हो चुके हैं। इसी वजह से इसे महाकुंभ कहा जा रहा है और इसमें आने वाला श्रद्धालुओं की संख्या पहले के किसी भी कुंभ से ज्यादा है। ऐसे में कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की गिनती के लिए यूपी सरकार ने हाईटेक उपकरणों का सहारा लिया है और इस बार AI बेस्ड कैमरे की मदद से लोगों की गिनती की जा रही है।
महाकुंभ की चर्चा पूरी दुनिया में
महाकुंभ की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। सात समंदर पार के लोग कुंभ की दिव्यता और भव्यता को देखने के लिए आ रहे है। भारत की प्राचीन परंपरा और यहां की सनातन संस्कृति विदेशी लोगों के मन को भा रही है। जिसके परिणामस्वरूप महाकुंभ में अब तक 35 करोड़ से भी ज्यादा श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगा ली है। बसंती पंचमी के मौके पर डेढ़ करोड़ से भी ज्यादा लोगों ने त्रिवेणी संगम में शाही स्नान किया और मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त किया। वहीं 10 लाख से अधिक श्रद्धालु महाकुंभ में कल्पवास कर रहे है।
महाकुंभ क्यों मनाया जाता है
पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश के लिए देवताओं और असुरों के बीच 12 दिन घमासान युद्ध हुआ। अमृत को पाने की लड़ाई के बीच कलश से अमृत की कुछ बूंदें धरती के चार स्थानों पर गिरी थीं। ये जगह हैं प्रयागराज, उज्जैन, हरिद्वार और नासिक। इन्हीं चारों जगहों पर कुंभ का मेला लगता है। जब गुरु वृषभ राशि में और सूर्य मकर राशि में होते हैं तब कुंभ मेला प्रयागराज में आयोजित किया जाता है। जब गुरु और सूर्य सिंह राशि में होते हैं, तब कुंभ मेला नासिक में आयोजित होता है। गुरु के सिंह राशि और सूर्य के मेष राशि में होने पर कुंभ मेला उज्जैन में आयोजित होता है। सूर्य मेष राशि और गुरु कुंभ राशि में होते हैं, तब हरिद्वार में कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है।
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