राज्य शासन द्वारा पेंशनर की सुविधा के लिए डिजीटल प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं। इसकी मॉनीटरिंग के लिए वित्त विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। राज्य स्तरीय बैंकिग कमेटी की प्रतिमाह होने वाली बैठक में भी इस सुविधा की समीक्षा की जाएगी। यह सुविधा पेंशनर को हर वर्ष बैंक जाने की बाध्यता से मुक्ति दिलाने के लिए आरंभ की गई है।
पेंशनर संगठनों द्वारा वित्त मंत्री से भेंट कर प्रतिवर्ष बैंक में जीवन प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने में आ रही कठिनाई से उन्हें अवगत कराया था। उल्लेखनीय है कि पेंशन नियमों के अंतर्गत राज्य शासन के सभी पेंशनरों को प्रत्येक वर्ष 1 नवम्बर की स्थिति में जीवित प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने का प्रावधान है। यह प्रमाण-पत्र पेंशनर जिस बैंक शाखा से पेंशन प्राप्त करते हैं, वहाँ प्रस्तुत करना होता है ।
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इंदौर में आयोजित होने वाले आईटी कॉन्क्लेव में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एनवीडिया जैसी बड़ी कंपनियां उपस्थिति दर्ज कराएंगी।मध्य प्रदेश सरकार का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग 27 अप्रैल को इंदौर के…









