मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में यूनियन कार्बाइड के ज़हरीले कचरे के विनिष्टीकरण से जुड़े मामले में चीफ जस्टिस की बेंच ने सुनवाई पूरी की. मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी. इस दौरान सरकार ने हलफनामा प्रस्तुत करते हुए ज़हरीले कचरे के निपटारे के लिए और समय मांगा.
कंटेनर्स को सावधानीपूर्वक अनलोड करने का निर्देश
सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा कि मिस पब्लिसिटी और फेक मीडिया रिपोर्ट्स के चलते पीथमपुर में हंगामा हुआ. इसके अलावा सरकार ने जहरीले कचरे को कंटेनर्स से अनलोड करने की अनुमति मांगी. जिसके बाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि कंटेनर्स को सावधानीपूर्वक और पूर्व दिशा-निर्देशों के अनुसार अनलोड किया जाए.
हाईकोर्ट ने सरकार को ज़हरीले कचरे के विनिष्टीकरण में सावधानी बरतने और सुरक्षा के पर्याप्त उपाय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. साथ ही कहा कि यह जानकारी आम जनता के सामने रखी जाए.
हाई लेवल कमिटी को जांच रिपोर्ट पेश करने की मांग
इधर, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में हाई लेवल कमिटी को जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देने की मांग की. साथ ही कहा कि सरकार से स्पष्ट किया जाए कि जहरीले कचरे के विनिष्टीकरण के दौरान क्या सुरक्षा उपाय अपनाए जा रहे हैं. याचिकाकर्ताओं के अनुसार, भोपाल गैस त्रासदी से 11 मिलियन मीट्रिक टन जहरीला कचरा बचा है. अब तक केवल 337 टन कचरा पीथमपुर भेजा गया है.
याचिकाकर्ता के वकील नमन नागराथ ने कहा कि हाई कोर्ट में सरकार के ऊपर छोड़ दिया है कि वह निर्णय और जो पुराना आदेश था उसका पालन करें, जो 3 दिसंबर 2024 का आदेश था.
डॉक्टर असोसिएशन के वकील अभिनव ढोंडकर ने कहा कि ज़हरीले कचरे का सुरक्षित और वैज्ञानिक ढंग से निपटान जरूरी है, वरना जन स्वास्थ्य को बड़ा खतरा हो सकता है.
बता दें कि अगली सुनवाई 18 फरवरी, 2025 को होगी. इस सुनवाई के दौरान मामले की प्रगति पर चर्चा की जाएगी.









