इंदौर: गांधीनगर से विजय नगर तक चल रहे मेट्रो प्रोजेक्ट के डायवर्शन में लापरवाही बरती जा रही है। निर्माण के लिए सीमेंट के डिवाइडर लगाकर ठेकेदारों ने सड़क की चौड़ाई कम कर दी और निगम मेट्रो का निर्माण के हवाला देकर सड़कों के गड्ढे भी नहीं भर रहा। लोग हादसों में अपनी जान गंवा रहे है। रविवार को सुखलिया ग्राम चौराहे पर पीएचडी स्काॅलर की जिस जगह सड़क हादसे में मौत हुई। वहां भी सड़क का गड्ढा और दरार हादसे की वजह बनी।
युवती अश्लेषा होलकर का दोपहिया वाहन दरार में फंसा और वह गिर गई। फिर उसे ट्रक रौंदता हुआ चला गया। आश्चर्य की बात है कि इस डायवर्शन रुट पर ट्रैफिक विभाग ने दिन मेें भी ट्रक व अन्य भारी वाहनों को आवाजाही की छूट दे रखी है। इस मार्ग पर सालभर में यह चौथा हादसा है,लेकिन फिर भी भूल नहीं सुधारी जा रही है। चार माह पहले एक सायकिलिस्ट भी इसी चौराहे पर हादसे का शिकार होकर घायल हो चुका है।
हादसे के बाद चुपके से भर दिया गड्ढा
सुखलिया ग्राम चौराहे पर रविवार को जिस गड्ढे के कारण युवती गिरी और ट्रक के नीचे आई। उसे शाम को नगर निगम की टीम ने चुपके से भर दिया। फुटपाथ और सड़क के बीच की गेप में सीमेंट क्रांक्रिट कर दिया गया। नगर निगम के अधीक्षण यंत्री महेश शर्मा ने कहा कि सड़क पर मेट्रो का काम चल रहा है। मेट्रो कार्पोरेशन को सड़क का रखरखाव करना चाहिए। हमने जोनल अधिकारी को भी वहां पेचवर्क के लिए कहा है।
सर्विस रोड पर चौपाटी, मेन रोड़ पर हादसे
गांधी नगर से रेडिसन होटल चौराहा तक मेट्रो प्रोेजेक्ट का काम दो साल तक और चलेगा, लेकिन इस व्यस्त मार्ग पर ट्रैफिक डायवर्शन पर कोई काम नहीं हुआ।मेघदूत चौराहा से बापट चौराहा तक 60 फीट की सर्विस रोड पर चौपाटी सज रही है। वहां वाहन नहीं चल सकते। दूसरी तरफ के सर्विस मार्ग पर वाहन पार्क हो रहे है। मध्य हिस्से की सड़क पर मेट्रो का काम होने के कारण शेड लगे है और संकरे हिस्से मेें दोपहिया, कार, स्कूल बस, ट्रक चल रहे है। दोपहिया अक्सर ट्रक की चपेट में आ रहे है।









