केंद्र सरकार के नौ वर्षों का कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सावन के चौथे दिन काशी से मिशन 2024 का शंखनाद कर दिया। अपनी काशी में पहुंचे प्रधानमंत्री ने करीब 35 मिनट के अपने संबोधन में विपक्ष पर जमकर शब्दबाण चलाए। साथ ही गरीब, दलित, वंचित, पिछड़ों और महिलाओं को साधने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। दुखती नब्ज पकड़ी, फिर जनकल्याणकारी योजनाओं का फायदा बताया। प्रधानमंत्री के भाषण के केंद्र में गरीब व शोषितों का स्वाभिमान रहा है। उन्होंने जनता को विपक्ष के भ्रष्टाचार और परिवारवाद की याद दिलाई। साथ ही भाजपा सरकार के सुशासन का बखान किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अपने संसदीय क्षेत्र में आयोजित उत्तर प्रदेश की पहली जनसभा में लोकसभा चुनाव का विकास का एजेंडा सेट कर दिया। जनसभा के मंच से उत्तर प्रदेश, पूर्वांचल व काशी का जिक्र किया तो गुजरात और राजस्थान की बात भी की है। साथ ही अपने नौ वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियां बताईं और रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया।
आजादी के बाद की सरकारों से अपनी सरकार की तुलना की और साफ बदलाव का संदेश दिया। इस बहाने भाजपा संगठन के लिहाज से महत्वपूर्ण काशी और गोरखपुर क्षेत्र की 27 लोकसभा सीटों की जनता को भी साधा है। प्रधानमंत्री के मंच पर दोनों क्षेत्र के लाभार्थियों को बुलाया और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाया गया। मथुरा, मिर्जापुर, भदोही, जौनपुर सहित पूर्वांचल के अन्य जिलों से आए लाभार्थियों से संवाद किया।
निकाय चुनाव में कम मतदान से बढ़ी चिंता : टिफिन बैठक के बहाने प्रधानमंत्री ने पार्टी, संगठन, पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं में भी जोश भरा है। सबको लग रहा है कि प्रधानमंत्री तक पहुंच है। सब बढ़े आत्मविश्वास के साथ चुनाव मैदान में जाने को तैयार हैं। दरअसल, हाल में हुए निकाय चुनाव में वाराणसी महानगर में मतदान कम हुआ था। इससे भाजपा नेता चिंतित हैं। 40 फीसदी के आसपास ही मत पड़े थे। हालांकि, मेयर व पार्षदों को रिकॉर्ड जीत मिली थी। इसके बावजूद प्रधानमंत्री या पार्टी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है।
इस बार दस लाख मत पाने का लक्ष्य
बीएचयू में सामाजिक विज्ञान संकाय के पूर्व प्रमुख प्रो कौशल किशोर मिश्रा कहते हैं, वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार की शुरुआत हो चुकी है। पीएम मोदी अपने कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कर रहे हैं। इसके पीछे दो कारण अहम हैं। पीएम मोदी ने पिछले चुनाव में करीब साढ़े साल लाख मत प्राप्त किए थे। इस बार उनका लक्ष्य 10 लाख से ज्यादा मत पाने का है। काशी पूरे देश के लिए आस्था की नगरी है, यहां से चुनावी शंखनाद का संदेश कोने-कोन में जाएगा।









