कर्नाटक में बीजेपी में फूट, कार्यकर्ताओं ने नहीं करने दिया येदियुरप्पा को प्रचार 

बेंगलुरु । कर्नाटक बीजेपी में फूट पड़ती नज़र आ रही है। भाजपा  के कार्यकर्ताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता बीएस येदियुरप्पा को चुनाव प्रचार रद्द करने को मजबूर कर दिया है। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा का चिकमंगलुरु जिले में पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा घेराव किए जाने के बाद आज बीजेपी को अपना चुनाव अभियान रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि ने येदियुरप्पा की घोषणा, कि उनके बेटे बीवाई विजयेंद्र आगामी चुनावों में परिवार के गढ़ शिकारीपुरा से चुनाव लड़ेंगे, को खारिज कर दिया था। इसके बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। 
चिकमंगलुरु जिले के मुदिगेरे निर्वाचन क्षेत्र में जब येदियुरप्पा बीजेपी की विजय संकल्प यात्रा का नेतृत्व करने के लिए पहुंचे। पार्टी कार्यकर्ताओं और सीटी रवि के समर्थकों ने लिंगायत समुदाय के प्रभावी नेता येदियुरप्पा की कार का घेराव किया और विधायक एमपी कुमारस्वामी को विधानसभा का टिकट नहीं दिए जाने की मांग की। कुमारस्वामी मुदिगेरे निर्वाचन क्षेत्र से एक और कार्यकाल की आस लगाए हैं।
विरोध प्रदर्शन के चलते नाराज दिख रहे येदियुरप्पा को रोड शो रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा। घटनास्थल के दृश्यों में उन्हें यात्रा में भाग लिए बिना ही वहां से जाते हुए और सीटी रवि को दूसरी तरफ अपने समर्थकों के साथ चलते हुए देखा जा सकता है।
कर्नाटक में जहां एक तरफ बीजेपी सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है वहीं पार्टी के अंदर हावी होती गुटबाजी पार्टी नेतृत्व के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। पीएम मोदी और अमित शाह ने येदियुरप्पा का दामन एक बार फिर थामा है तो वहीं स्थानीय नेताओं को येदियुरप्पा और उनके बेटे बीवाई विजयेंद्र का कद बढ़ना रास नहीं आ रहा है। 
साल 2019 के लोकसभा चुनावों में कर्नाटक में बीजेपी की नीति तय करने में सक्रिय भूमिका निभाने वाले विजयेंद्र को पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने बीजेपी प्रदेश इकाई का उपाध्यक्ष बना दिया। तकरीबन 50 साल के विजयेंद्र को उनके पिता येदियुरप्पा अपनी शिकारीपुरा सीट से विधायक बनाना चाहते हैं। इस बारे में जैसे ही येदियुरप्पा ने बयान दिया, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि भड़क गए। उन्होंने कहा, हमारी पार्टी में किचिन में फैसले नहीं होते। सिर्फ इसलिए कि वे नेताओं के बच्चे हैं, उन्हें टिकट नहीं मिलेगा। और टिकट देने का फैसला उनके घर पर नहीं हो सकता। अब आपने विजेंद्रा के बारे में पूछा, उन्हें टिकट देने का फैसला किचिन में नहीं, संसदीय बोर्ड लेगा। 

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