सिंगरौली में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला, बीजेपी-कांग्रेस के बीच ‘आप’ भी ठोक रही ताल, जानें कैसे बना नगर निगम

सिंगरौली। श्रृंगी ऋषि की तपोभूमि सिंगरौली कभी काले पानी के सजा देने के लिए देश में ही एक जगह मानी जाती थी. अपनी इस छवि को तोड़ते हुए मौजूदा वक्त में सिंगरौली मध्य प्रदेश की ऊर्जा धानी के रूप में अपनी जगह बना चुका है. नगरीय निकाय चुनाव के दूसरे चरण में सिंगरौली नगर निगम के लिए भी वोट डाले जा रहे हैं. सिंगरौली में 45 वार्ड हैं. जिसमें 2 लाख 3 हजार मतदाता हैं. 45 वार्डों में 11 थर्ड जेंडर मतदाता भी हैं. नगर निगम के चुनाव के लिए 240 मतदान केंद्र बनाए गए हैं.जिन पर 1500 अधिकारी और कर्मचारी चुनाव की ड्यूटी में तैनात किए गए हैं. जिले में 60 मतदान केंद्रों को अति संवेदनशील भी माना गया है. हम आपको मतदान का हाल जानने के साथ ही सिंगरौली के नगर निगम बनने का इतिहास भी बताएंगे.

triangular contest in singrauli

सिंगरौली में त्रिकोणीय मुकाबला

कैसे नगर निगम बना सिंगरौली: वर्ष 2000 में विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण सिंगरौली को मर्ज कर नगर पालिका निगम सिंगरौली का दर्जा दिया गया था. नगर निगम के सबसे पहले चुनाव में इसे महिला सामान्य सीट घोषित किया गया. जब यहां नगर निगम का पहला चुनाव हुआ उस दौरान प्रदेश में दिग्विजय सिंह सीएम थे और कांग्रेस की सरकार थी. कांग्रेस से श्रीमती रेनू अशोक शाह और बीजेपी से श्रीमती मधु झा महापौर के लिए मैदान में उतारा गया था. पहले चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार रेनू अशोक शाह ने 15 सौ वोटों से जीत हासिल की थी. वे सबसे कम उम्र 25 वर्ष 1 माह की थी जो उस दौरान देश की सबसे कम उम्र की महापौर बनी थी. उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी शामिल किया गया है.

2005 में पिछड़ा वर्ग के आरक्षित हुआ महापौर का पद: 2005 में महापौर पद के लिए दूसरी बार चुनाव हुआ और सीट पिछड़ा सीट के लिए आरक्षित हुई. इस चुनाव में कांग्रेस के राम लल्लू वैश्य महापौर बने.
– सन 2008 में सीधी जिले से सिंगरौली को अलग कर एक नया जिला बनाया गया.
– 24 मई 2008 को भाजपा सरकार ने सिंगरौली को जिला बनाने के बाद 2009 में नगरी निकाय चुनाव कराया गया जो सिंगरौली जिले मे नगर निगम बनाने के बाद वह पहला चुनाव था.
-उस चुनाव मे भाजपा ने पूर्व जिला अध्यक्ष कांति शीर्ष देव सिंह को महापौर का प्रत्याशी बनाकर चुनावी मैदान में उतारा. कांति देव सिंह चितरंगी तहसील की वर्दी खटाई रियासत के राजकुमार भी थे. कांग्रेस ने एक बार फिर रेनू शाह को मैदान में उतारा.
– उसी दौरान टिकिट न मिलने से नाराज अजय सिंह ‘राहुल भैया’ के कट्टर समर्थक माने जाने वाले अरविंद सिंह चंदेल ने भी बगावत कर दी. उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी रेनू शाह का विरोध किया बावजूद इसके रेनू शाह 2700 वोटों से चुनाव जीतीं.
– 2015 के चुनाव में महापौर सीट एससी महिला के लिए आरक्षित रही. उस चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी प्रेमवती खैरवार को महापौर चुना गया.

इस बार त्रिकोणीय मुकाबला, 1 दर्जन उम्मीदवार हैं मैदान में
1-अरविंद कुमार सिंह चंदेल= कांग्रेस
2-चंद्र प्रताप सिंह विश्वकर्मा- भाजपा
3- रानी अग्रवाल- आम आदमी पार्टी
4- भास्कर मिश्रा- शिवसेना
5-तेज प्रताप सिंह -जनता दल यूनाइटेड
6 -विनय कुमार यादव- समाजवादी पार्टी
7-बंश रूप शाह- बहुजन समाज पार्टी
8-पुष्पेंद्र गुप्ता =भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
9- लालबाबू कुशवाहा-जन अधिकार पार्टी
10-ओम प्रकाश शाह- निर्दलीय
11-धर्मेंद्र कुमार, निर्दलीय
12-भगवान प्रसाद, निर्दलीय

सिंगरौली नगर निगम में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला है. भारतीय जनता पार्टी से महापौर प्रत्याशी चंद्र प्रताप विश्वकर्मा हैं तो वहीं कांग्रेस ने अरविंद सिंह चंदेल को चुनावी मैदान में उतारा. इन दोनों पार्टियों के बीच आम आदमी पार्टी भी अपनी किस्मत आजमा रही है. पार्टी के चीफ अरविंद केजरीवाल भी यहां आप प्रत्याशी के समर्थन में रैली और रोड शो कर चुके हैं. जिले में आप की मौजूदगी भी मजबूत मानी जा रही है. भाजपा को शिकस्त देने की स्थिति में आम आदमी पार्टी मौजूदा वक्त में निर्णायक के तौर पर अपनी भूमिका निभा सकती है. इसलिए मुकाबले को त्रिकोणीय माना जा रहा है.

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