इंदौर : कांग्रेस ने गुरुवार रात अपने 15 महापौर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी जिसमें इंदौर से विधायक संजय शुक्ला के नाम पर अधिकृत रूप से मोहर लगा दी। इसी कड़ी में देर रात भाजपा ने संभागीय चयन समिति की घोषणा कर चौंका दिया। वह इसलिए कि इसमें तीन नाम विधायक रमेश मेंदोला, वरिष्ठ नेता मधु वर्मा और प्रदेश उपाध्यक्ष जीतू जिराती के हैं। ये तीनों महापौर पद के लिए कद्दावर नेता के रूप में चर्चाओं में थे। खास बात यह कि इसमें ओबीसी वर्ग से मधु वर्मा व जीतू जिराती हैं। वर्मा को तो समिति का संयोजक ही बना दिया गया। ऐसे में ये तीनों महापौर पद की दौड़ से बाहर हो गए हैं। मौजूदा समीकरण, पार्टी थीम तथा परिस्थितियां संकेत दे रही है कि पार्टी इस बार युवा चेहरा (50 वर्ष से कम), सवर्ण और संघ समर्थित को ही प्रत्याशी बनाना चाहती है। इसका खास कारण संजय शुक्ला का वह ब्राह्मण वोट बैंक हैं जिनके बल पर उन्होंने विधानसभा 1 का चुनाव जीता था।
दरअसल, ओबीसी को ऊंचाई देने इसी कड़ी में पार्टी ने कविता पाटीदार को राज्यसभा प्रत्याशी घोषित किया था तब से ही पार्टी के एक धड़े में यह उम्मीद थी कि इंदौर महापौर पद भले ही सामान्य वर्ग का हो लेकिन पार्टी ओबीसी प्रत्याशी को खड़ा करेगी। अब चूंकि तो ओबीसी के दो प्रबल दावेदार मधु वर्मा व जीतू जिराती दौड़ से बाहर हो गए हैं और सामने संजय शुक्ला प्रतिद्वंदी है, यह संभावना बलवती है कि भाजपा उसी काट का प्रत्याशी खड़ा करेगी जो ब्राह्णण वोट बैंक को हासिल कर सके। इसमें डॉ. निशांत खरे, उमेश शर्मा सहित कई नाम चर्चाओं में हैं।
जहां तक मेंदोला का सवाल है कि वे इस पद के लिए सशक्त प्रत्याशी हो सकते थे लेकिन पार्टी ने उन्हें चयन समिति में शामिल कर विराम लगा दिया। वैसे मेंदोला के पहले भी ऐसा होता रहा है कि जब मंत्री पद के दावेदारी में उनका नाम चला तो बाद में समीकरण बदले और उन्हें नई बड़ी जिम्मेदारी दे गई गई। समिति में वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री तुलसी सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, मालिनी गौड व कविता पाटीदार भी हैं। ऐसे में संभव है कि नामों के विचार पर भी खूब घमासान होगा और इसमें अंतिम मुहर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और संघ की होगी। इसके बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
– बहरहाल, अब महापौर के अन्य दावेदारों में अब डॉ. निशांत खरे है। उनके नाम पर संघ की पूरी सहमति है और दूसरा यह कि बीते दो साल में (कोरोना काल) में उन्होंने अपना एक अलग स्थान बनाया है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान भी कोरोना की दूसरी लहर के बाद इंदौर में हुए एक कार्यक्रम में उनकी मुक्तकंठ प्रशंसा भी कर चुके हैं।
– इसी कड़ी में युवा चेहरा में अगला नाम पुष्यमित्र भार्गव का है, जो प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के नजदीकी बताए जाते हैं। हालांकि पार्टी के एक धड़े का मानना है कि उनके लिए पड़ाव कठिन होगा।
– युवा चेहरे में एक नाम गौरव रणदिवे का भी है लेकिन वर्तमान में इंदौर के दो कद्दावर नेताओं (चयन समिति में भी है) की नाराजगी के चलते उनकी राह आसान नहीं है।
– हाल ही में प्रदेश प्रवक्ता उमेश शर्मा का भी नाम चर्चाओं में है। वे गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के नजदीकी है। वरिष्ठ नेता सुमित्रा महाजन, सांसद शंकर लालवानी जैसे नेताओं को भी उन आपत्ति नहीं है। शर्मा सालों से सक्रिय राजनीति में है।
अब बात करें पुराने व दावेदारों की तो उसमें पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता, गोपीकृष्ण नेमा आदि के नाम हैं। ऐसे ही नए नामों में गोविंद मालू, अजयसिंह नरूका, मुकेशसिंह राजावत, कमल वाघेला आदि के नाम हैं। हाल ही में ताई व सांसद शंकर लालवानी समर्थक अशोक डागा का भी नाम चर्चाओं में है। इसके अलावा खास मुद्दा इंदौर के गौरव का है जो स्वच्छता में 5 बार देश में तमगा हासिल कर चुका है। ऐसे में महापौर पद का चयन अपने आप में अहम होगा क्योंकि हाल में कैलाश विजयवर्गीय कह चुके हैं कि प्रत्याशी ऐसा होना चाहिए जो शहर हित के लिए राज्य और केंद्र से राशि स्वीकृत करा सके।









