बिजली संकट पर कृषि मंत्री कमल पटेल बोले ऊर्जा मंत्री से- अगर फसल निपटी तो किसान हमें भी निपटा देगा, वीडियो वायरल

इंदौर। मध्यप्रदेश में बिजली संकट गहराता जा रहा है. इसके साथ ही मंत्रियों और विधायकों की चिंताएं भी बढ़ने लगी हैं. कृषि मंत्री कमल पटेल वीडियों में खुद स्वीकार कर रहे हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में 10 घंटे भी बिजली नहीं मिल पा रही है. उन्होंने कहा बिजली नहीं मिल पाने के कारण हरदा और होशंगाबाद जिले में मूंग की 4000 करोड़ रुपए की फसल खतरे में है. यदि यह फसल निपट गई तो किसान हमें भी निपटा देगा.

ग्रामीण क्षेत्रों में 10 घंटे तो बिजली दिलवा दो : उन्होंने ऊर्जा मंत्री को वीडियो कॉलिंग के जरिए कहा है कि कम से कम ग्रामीण क्षेत्रों में 10 घंटे तो बिजली दिलवा दो. इतना ही नहीं, कमल पटेल ऊर्जा मंत्री को यह बताते नजर आ रहे हैं कि उन्होंने बिजली कटौती के मामले में विद्युत वितरण कंपनी के एमडी से जब चर्चा की तो उन्हें लोड शेडिंग के कारण कटौती की वजह बताई गई. इस पर भी उन्होंने ऊर्जा मंत्री से अनुरोध किया कि लोडसेडिंग के नाम पर विद्युत वितरण कंपनियां जो कटौती कर रही हैं, उसे भी रोका जाए.

सभी जिलों में बिजली संकट : गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भीषण विद्युत कटौती के दौर में खुद कैबिनेट मंत्री कमल पटेल को कृषि क्षेत्र में ही फसलों के चौपट होने के लिए अब फसलों की सिंचाई के लिए कम से कम 10 घंटे बिजली देने की गुहार ऊर्जा मंत्री से लगानी पड़ रही है. कमोबेश यही स्थिति प्रदेश के विभिन्न जिलों की है, जबकि शहरों में भी अब सुबह की बिजली कटौती शुरू हो गई है, जिसके कारण लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

बीजेपी सरकार की चिंताएं बढ़ीं : हालांकि इस मामले में सरकार शुरू से दावा करती आ रही है कि कोई भी बिजली संकट नहीं है. जो भी बिजली संकट की स्थिति बनेगी, उसे निपट लिया जाएगा.अब खुद मंत्री ही स्वीकार करते नजर आ रहे हैं कि यदि फसलों के खराब होने से किसान निपटे तो इससे आगामी नगरीय निकाय चुनाव और पंचायत चुनावों के अलावा विधानसभा चुनावों में मंत्रियों को भी निपटना पड़ सकता है. वहीं, कृषि मंत्री कमल पटेल का यह वीडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस नेता नरेंद्र सलूजा ने इस मामले में ट्वीट करते हुए कहा है कि जब मंत्री खुद यह मान रहे हैं कि बिजली कटौती के कारण निपट सकते हैं, इसका मतलब यह है कि आगामी चुनाव में भाजपा सरकार को बिजली कटौती का खामियाजा जरूर भुगतना पड़ेगा. 

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