एमपी में भाजपा और कांग्रेस का एक दूसरे में फूट का दावा

भोपाल। मध्य प्रदेश में सत्ताधारी दल भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस इन दिनों आमने-सामने हैं. इसकी वजह कोई जनता का मुद्दा नहीं बल्कि दलबदल है. दोनों ओर से दावे किए जा रहे हैं कि बड़ी संख्या में विधायक और नेता पाला बदलने वाले हैं. राज्य में सत्ता का बदलाव दलबदल से हुआ था और 24 से ज्यादा विधायकों ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था, जिसके चलते कांग्रेस के हाथ से बाजी निकल गई और भाजपा की सत्ता में वापसी हुई. उसके बाद कई नेताओं और विधायकों ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा.

नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह का खुलासा: संभावित दलबदल का बड़ा खुलासा राज्य सरकार के नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने किया है. उनका कहना है कि कांग्रेस के कई विधायक और नेता भाजपा में आने को तैयार हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस में कोई भी नेता रहना नहीं चाहता. इशारों-इशारों में तो उन्होंने यहां तक कह दिया कि भाजपा जिस दिन चाहेगी कई विधायक कांग्रेस छोड़कर उसके साथ आ जाएंगे.

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का दावा :एक तरफ भूपेंद्र सिंह का यह बयान आया तो दूसरी ओर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी दावा कर दिया कि भाजपा के कई विधायक कांग्रेस में आने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा है कि कई भाजपा विधायक मेरे संपर्क में हैं.

गृह मंत्री अमित शाह के भोपाल दौरे के दौरान कांग्रेस ने साधा निशानाः अभी हाल में ही मध्य प्रदेश में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भोपाल आए हुए थे. कार्यक्रम के दौरान जब मंच पर भाषण देने के लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान उठे, तो उसके बाद आगे की पंक्ति में बैठे मंत्री अरविंद भदौरिया ने खड़े होकर ताली बजाई. उसी दौरान गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने उनका कुर्ता पकड़कर कुर्सी पर बैठाने की कोशिश की. गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के द्वारा कुर्ता खींचने का यह वीडियो अब प्रदेश में तेजी से वायरल हो रहा है. लगातार कांग्रेस पार्टी इस पर निशाना साध रही है. कांग्रेस पार्टी ने कहा कि शिवराज सरकार के नेताओं में अंदरूनी खेमेबाजी अब धीरे-धीरे सामने आ रही है. जैसे ही चुनाव नजदीक आते जाएंगे वैसे ही बीजेपी में यह खेमेबाजी रोड पर नजर आयेगी.

भाजपा कांग्रेस क्यों कर रही है दलबदल के दावे ? : राज्य में भाजपा और कांग्रेस दोनों राजनीतिक दलों ने अपने विधायकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया है. इसमें कई विधायक की अपने क्षेत्र में स्थिति कमजोर निकली है. संभावना इस बात की जताई जा रही है कि वर्तमान में कई ऐसे विधायक हैं जिन्हें पार्टी अगली बार चुनाव मैदान में उतारने से कतराएगी. इसके साथ ही जिन विधायकों के तेवर पार्टी के खिलाफ हैं, उनका भी टिकट कट सकता है. परिणाम स्वरूप जो विधायक अपने को खतरे में पा रहे हैं वे पार्टी बदलने की तैयारी में हैं. यही कारण है कि भाजपा और कांग्रेस की ओर से विधायकों के पाला बदलने के दावे किए जा रहे हैं. 

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