कॉरपोरेट कंपनियों में मर्ज करने का फैसला, मोदी सरकार ने लगाई मुहर

नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए 41 आर्डिनेंस फैक्ट्रियों को सात कॉरपोरेट कंपनियों में तब्दील करने का फैसला किया है। इसके साथ ही आर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड का अस्तित्व भी खत्म हो जाएगा। आर्डिनेंस फैक्ट्रियों में कार्यरत करीब 70 हजार कर्मचारियों को सात नई कॉरपोरेट कंपनियों में समायोजित किया जाएगा। शुरुआत में उन्हें दो साल की प्रतिनियुक्ति पर नई कंपनियों में भेजा जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में  यह फैसला लिया गया। इस मुद्दे पर राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बने एक अधिकार प्राप्त मंत्री समूह की सिफारिशों को कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान की। सूत्रों के अनुसार, जिन सात कॉरपोरेट कंपनियों का गठन किया जाएगा वह पूरी तरह से सरकारी होंगी तथा आर्डिनेंस फैक्ट्रियों के मौजूदा कार्मिकों के हितों को कोई नुकसान नहीं होगा। आर्डिनेंस फैक्ट्रियों का नई कंपनियों में समायोजन उनके कार्य के हिसाब से किया जाएगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार, जो सात कंपनियां बनाई जाएंगी उनमें एक गोलाबारूद और विस्फोटक समूह की होगी। इस प्रकार के उत्पादन में लगी सभी आर्डिनेंस फैक्ट्रियों को इसमें मर्ज किया जाएगा। दूसरी कंपनी वाहन समूह की होगी जिसमें टैंक, सुरंगरोधी वाहन आदि बनाने वाली फैक्ट्रियां मर्ज होंगी। तीसरा समूह हथियार और उपकरणों का होगा। इसमें छोटे, मध्यम एवं बड़े कैलीबर के हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियां समाहित होंगी। चौथी कंपनी सैनिकों से जुड़े साजोसामान बनाने के लिए होगी जो ट्रूप कंपफर्ट आइटम ग्रुप होगा। पांचवा समूह एनसिलरी ग्रुप होगा, छठा आप्टो इलेक्ट्रानिक्स ग्रुप होगा जबकि सातवीं कंपनी पैराशूट ग्रुप की होगी। इस प्रकार सभी 41 फैक्ट्रियों को उनके रक्षा उत्पादन सामग्री के हिसाब से इन सात कंपनियों में तब्दील कर दिया जाएगा। सरकार ने कहा कि आर्डिनेंस फैक्ट्रियों को कारपोरेट कंपनियों में तब्दील करने पर लंबे समय से विचार किया जा रहा था और अंतत काफी सोच विचार के बाद यह निर्णय लिया गया है। इससे उनकी क्षमता में इजाफा होगा, उत्पादन बढ़ेगा तथा उत्पादों की लागत में कमी लाना भी संभव होगा। उन्हें और नए किस्म और गुणवत्ता के हथियारों के उत्पादन बढ़ाने का भी मौका मिलेगा। निर्यात बढ़ेगा तथा वह बाजार में प्रतिस्पर्धी भूमिका में आ सकेंगी।

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