एंकर-केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने भिक्षुक मुक्त भारत बनाने के लिए देश के दस शहरों के चयन पायलट प्रोजेक्ट के रूप में किया है। इन दस शहरों में इंदौर शहर भी शामिल है। मंत्रालय द्वारा इस प्रोजेक्ट के लिए प्रत्येक चयनित शहर में वर्कशॉप की जा रही। पहली वर्कशॉप इंदौर में हुई। इस वर्कशॉप के लिए भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की संयुक्त सचिव राधिका चर्कवर्ती विशेष रूप से इंदौर आई थी। वर्कशॉप में नगर निगम, महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ ही अलग अलग एनजीओ संस्थान के पदाधिकारी मौजूद थे। संयुक्त सचिव ने नोडल एजेंसी द्वारा भिक्षुक मुक्त शहर बनाने के लिए तैयार की गई कार्ययोजना की जानकारी ली, उन्होंने नोडल एजेंसी को चार बिंदुओं के प्लान तैयार करने के निर्देश दिए है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की संयुक्त सचिव राधिका चक्रवर्ती के अनुसार भीख माँगना एक मजबूरी है, हम इस मजबूरी को दूर कर उनके हाथों को काम देना चाहते है। इसके लिए हमने इस वर्ष के अंत तक देश के दस शहरों को भिक्षुक मुक्त बनाने के लक्ष्य रखा है। उन्होंने बताया कि देश की मेट्रो सिटी के साथ ही टू टियर और थ्री टियर शहरों का चयन इस प्रोजेक्ट के लिए किया है। यह प्रोजेक्ट सफल होने के बाद इसे पूरे देश में लागू करने का प्रयास किया जाएगा। आंकड़ों की बात की जाए तो इंदौर शहर में तीन हजार से लेकर पांच हजार भिक्षुक होने की सम्भावना है, सर्वे कर सभी की जानकारी जुटाई जाएगी। सर्वे पूरा होने के बाद सभी की क्षमताओं के आधार पर उन्हें रोजगार से जोड़ा जाएगा।
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