बीएसएनएल के हजारों कर्मचारियों ने लिया वीआरएस

देश की सबसे बड़ी संचार कंपनी से अधिकारियों कर्मचारियों की 31 जनवरी को वीआरएस के तहत थोक बंद विदाई ली। पूरे देश भर से बीएसएनएल के लगभग 78 हजार 500 अधिकारी-कर्मचारी को रिटायर किया गया। निजी टेलीकॉम कंपनियों से प्रतिस्पर्धा और अधिकारियों कर्मचारियों के भारी-भरकम वेतन के बोझ से जूझ रही, देश की सबसे बड़ी संचार कंपनी बीएसएनएल ने अपने 78 हजार 500 अधिकारी कर्मचारियों को वीआरएस योजना का लाभ देते हुए सेवा से विदाई दे दी है। इंदौर रीजन में ही स्थिति यह है कि यहां बीएसएनएल मुख्यालय और सर्किल में तकनीकी और गैर तकनीकी श्रेणी के 710 में से 428 अधिकारी कर्मचारियों ने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी है। कर्मचारियों और अधिकारियों का कहना है कि बीएसएनल को फायदा पहुंचाने के लिए हमने वीआरएस लिया है।
गौरतलब है बीएसएनएल को अपने अधिकारियों कर्मचारियों के वेतन पर प्रतिमाह 850 करोड रुपए का भुगतान करना पड़ रहा है, जबकि काम के लिहाज से पुराने अधिकारी कर्मचारी नई टेक्नोलॉजी में फिट नहीं बैठ पा रहे थे। ऐसे में बीएसएनएल ने वीआरएस के लिए लाभ की स्कीम घोषित की तो ना केवल पुराने बल्कि वीआरएस के लिए निर्धारित सेवा शर्तों के दायरे में आने वाले अधिकांश अधिकारी कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ने का फैसला लिया। इसके बाद सभी ने अपने उसी ऑफिस में आयोजित एक विदाई एवं सम्मान समारोह में अपने सहकर्मियों के साथ बीआरएस लिया, जहां वे रोज ही ड्यूटी करने जाते थे। जहां इन कर्मचारियों को उनके वरिष्ठ अधिकारियों ने शाल श्रीफल देकर विदाई दी। गौरतलब है सरकारी सेक्टर के अलावा आर्थिक संकट की यही स्थिति प्राइवेट सेक्टर की टेलीकॉम कंपनियों की भी है, जिनके बीच जारी प्रतिस्पर्धा के चलते इनमें भी डेढ़ लाख से ज्यादा कर्मचारी बेरोजगार हुए हैं। इधर संचार विभाग में भी यह माना जा रहा था कि रेलवे बीमा सेक्टर और एविएशन आदि सेक्टरों में केंद्र सरकार की निजीकरण की नीति बीएसएनएल में भी लागू हो सकती है। इस आशंका के चलते भी बड़ी संख्या में लोगों ने नौकरी छोड़ी है। हालांकि अब बड़ी संख्या में अधिकारियों कर्मचारियों के रिटायर होने के बाद साढे 500 सौ करोड़ की बचत होगी, जबकि वेतन पर 260 करोड़ ही देने पड़ेंगे।

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