हिंदू इतिहास के अनुसार कब हुई मनुष्य की उत्पत्ति?

यदि हम वेद और पुराणों में श्रीराम और श्रीकृष्ण की वंशावली को पढ़ते हैं तो उनके पूर्वज सप्त ऋषि और ब्रह्मा को माना जाता है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार ब्रह्मा से लेकर श्रीराम तक कुल 40 पीढ़ियां होती हैं। पुराणों के अनुसार महाभारत काल के शल्य कुश की 50वीं पीढ़ी में हुए थे। बाद के इतिहासकारों के अनुसार श्रीराम से लेकर अब तक कुल 309 पीढ़ियां हो चुकी हैं। ब्रह्मा से लेकर अब तक के इतिहास को हम हिंदू इतिहास मानकर उसको क्रमबद्ध तरीके से लिख सकते हैं। वेदों के महान पंचनंद यानी यदु, पुरु, तुर्वसु, द्रुहु और अनु भी ब्रह्मा के कुल के ही हैं। यदु से यादव, तुर्वसु से यवन, द्रुहु से भोज, अनु से मलेच्छ और पुरु से पौरव वंश की स्थापना हुई। वेद, पुराण, रामायण और महाभारत पढ़ने के बाद हम यह तय करने की स्थिति में होते हैं कि हिंदू धर्म अनुमानित रूप से करीब 90 हजार वर्ष प्राचीन हो सकता है। यदि हम हिंदू इतिहास के कालखंड को विभाजित कर लेते हैं तो उसको लिखने में आसानी हो सकती है।

विज्ञान कहता है कि धरती पर जीवन की उत्पत्ति 60 करोड़ वर्ष पूर्व हुई एवं महाद्वीपों का सरकना 20 करोड़ वर्ष पूर्व प्रारंभ हुआ, जिससे पांच महाद्वीपों की उत्पत्ति हुई। स्तनधारी जीवों का विकास 14 करोड़ वर्ष पूर्व हुआ। मानव का प्रकार (होमिनिड) 2.6 करोड़ वर्ष पूर्व आया, लेकिन आधुनिक मानव 2 लाख वर्ष पूर्व अस्तित्व में आया। पिछले पचास हजार (50,000) वर्षों में मानव समस्त विश्व में जाकर बस गया। विज्ञान कहता है कि मानव ने जो भी यह अभूतपूर्व प्रगति की है वह 200 से 400 पीढ़ियों के दौरान हुई है। उससे पूर्व मानव पशुओं के समान ही जीवन व्यतीत करता था।

विज्ञान के अनुसार मानव जाती के काल का वर्गीकरण प्रागैतिहासिक काल, प्राचीन युग, मध्यकालीन युग, आधुनिक युग और समकालीन युग इस तरह किया गया है। आप इस तरह भी वर्गीकरण कर सकते हैं- पुरापाषाण युग, कृषि युग, औद्योगिक युग। परंतु आधुनिक ज्योतिष ग्रंथों में ईसा से करीब 10000 (दस हजार) वर्ष पूर्व के काल को अंधकार काल, 10001 से लेकर 500 ईसा पूर्व के काल को उदयकाल, 501 ईसा पूर्व से लेकर 500 ईस्वी तक के काल को आदिकाल, 501 ईस्वी से लेकर 1000 ईस्वी तक के काल को पूर्व मध्य काल, 1001 से लेकर 1600 ईस्वी तक के काल को उत्तर मध्यकाल और 1601 से लेकर अब तक के काल को आधुनिक काल माना जाता है।

उपरोक्त सभी काल को आधुनिक विज्ञान अब नहीं मानता है। आधुनिक विज्ञान मानता है कि मानव रूप सबसे पहले लगभग 315 लाख साल पहले अफ्रीका के क्षेत्रों में चला और विकसित हुआ था। डार्विन ने कहा कि प्राइमेट्स, हमारे वंशज, वानर थे, और वे हमारे पहले पूर्वज हैं और अब होमो सेपियंस हमारा वैज्ञानिक नाम है। होमो सेपियंस प्राइमेट्स से हमारे वर्तमान रूप में विकसित हुए। हालांकि इस सिद्धांत को चुनौति देने वाले भी मानव और जीव वैज्ञानिक मिल जाएंगे।

मनुष्य की उत्पत्ति का सिद्धांत हर धर्म में अलग-अलग है। संसार के इतिहास और संवत्सरों की गणना पर दृष्टि डालें तो ईसाई संवत सबसे छोटा अर्थात 2024 वर्षों का है। ईसा संवत से अधिक दिन मूसा द्वारा प्रसारित मूसाई संवत 3,591 वर्ष का है। इससे भी प्राचीन संवत युधिष्ठिर के प्रथम राज्यारोहण से प्रारंभ हुआ था। उसे 4,178 वर्ष हो गए हैं। इससे पहले कलियुगी संवत 5,123 वर्ष पहले शुरू हुआ। इब्रानी संवत के अनुसार 6,035 वर्ष हो चुके हैं। इजिप्शियन संवत 28,675 वर्ष और फिनीशियन संवत 30,093 वर्ष का माना गया है। बाइबल के जानकारों का मानना है कि मनुष्य की उत्पत्ति कुछ हजार वर्ष पूर्व हुई है जैसा कि हमें ओल्ड टेस्टामेंट में वंशावली का क्रम पढ़ने को मिलता है। रूढ़िवादी ईसाई धर्म के भीतर, धर्मशास्त्रियों, दार्शनिकों और वैज्ञानिकों के एक समूह मानता है कि आदम को ईश्वर ने लगभग 10,000 ईसा पूर्व से 4000 ईसा पूर्व के बीच बनाया था।

यदि हम हिंदू धर्म के अनुसार मानव उत्पत्ति की बात करें तो वर्तमान समय वैवस्वत मनु का चल रहा है। वैवस्तु मनु का संवत लेते हैं, जो 14 मन्वंतरों में से एक है। उससे अब तक का मनुष्योत्पत्ति काल 12,05,33,123 वर्ष का हो जाता है जबकि भारत के आदि ऋषियों ने किसी भी धर्मानुष्ठान और मांगलिक कर्मकांड के अवसर पर जो संकल्प पाठ का नियम निर्धारित किया था और जो आज तक ज्यों का त्यों चला आता है उसके अनुसार मनुष्य के आविर्भाव का समय 1,97,29,455 वर्ष होता है जबकि 1960853124 वर्ष पहले सृष्टि की उत्पत्ति हुई थी। हिंदू धर्म मानता है कि मनुष्य कई बार अस्तित्व में आया और मिट गया। वर्तमान का मनुष्य मनु की संतानों में से है।

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