अमेरिका ने इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए काउंटर अटैक पर चुप्पी साध ली।

वॉशिंगटन

अमेरिका ने इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए काउंटर अटैक पर चुप्पी साध ली है. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरिन जीन-पियरे ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘मुझे पता है कि मिडिल ईस्ट की रिपोर्ट में सबकी बहुत रुचि है. मुझे पता है कि आप सभी मुझसे इसके (इजरायल का ईरान पर जवाबी हमला) बारे में जरूर पूछेंगे, लेकिन हमें कोई टिप्पणी नहीं करनी है. बाइडन प्रशासन शुरू से ही स्पष्ट रहा है कि वे इस संघर्ष को बढ़ते नहीं देखना चाहते. हम क्षेत्र में तनाव को कम करने के लिए अपने सहयोगियों के साथ परामर्श करना जारी रखेंगे.’ बता दें कि इससे पहले अमेरिका ने इजरायल को ईरान पर हमला नहीं करने की सलाह दी थी.

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने बेंजामिन नेतन्याहू को साफ कहा था कि अगर इजरायल की ओर से ईरान पर जवाबी हमला होता है, तो अमेरिका इसमें तेल अवीव की मदद नहीं करेगा. लेकिन अब इजरायल के काउंटर अटैक पर अमेरिका की चुप्पी से सवाल उठने लगे हैं कि क्या उसने ईरान पर हमले को लेकर अपना स्टैंड बदल लिया है. जर्मनी और ब्रिटेन ने भी इजरायल को ईरान के साथ युद्ध में नहीं उलछने की सलाह दी थी. इन तीनों देशों ने कहा था कि इजरायल की ईरान के खिलाफ कोई भी जवाबी कार्रवाई मीडिल ईस्ट को बड़े युद्ध की तरफ ले जा सकती है.

इजरायल अपनी सुरक्षा के जो जरूरी होगा करेगा: नेतन्याहू

वहीं प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इजरायली वॉर और सुरक्षा कैबिनेट की बैठक में साफ किया था कि सहयोगी देशों की सलाह चाहे जो भी हो, हम किसी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे और ईरान पर हमला कब करना है इसका फैसला खुद करेंगे. नेतन्याहू ने कहा था, ‘दुनिया के नेताओं ने सुझाव और सलाह दिए हैं. मैं इसकी सराहना करता हूं. लेकिन मैं साफ करना चाहता हूं कि हम अपने फैसले खुद लेंगे. इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए जो भी जरूरी होगा, वह सब कुछ करेगा.’

दमिश्क में ईरानी दूतावास पर हुए हमले के बाद बढ़ा तनाव

बता दें कि सीरिया की राजधानी दमिश्क में ईरानी वाणिज्य दूतावास पर 1 अप्रैल को हमला हुआ था, जिसमें ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड के 7 सदस्य और 6 सीरियाई नागरिक मारे गए थे. हालांकि, इजरायल इस हमले में अपनी संलिप्तता से इनकार कर रहा है. लेकिन ईरान का कहना है कि हमला इजरायल ने ही किया था. इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 13 अप्रैल को इजरायल पर 300 ड्रोन और मिसाइलें दागी थीं. हालांकि, इन हमलों से इजरायल में कुछ खास नुकसान नहीं हुआ. इजरायली डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को इंटरसेप्ट कर हवा में ही नष्ट कर दिया. जो कुछ मिसाइलें ​बच गईं, वे भी सिर्फ डेड सी तक पहुंच सकीं.

जवाबी कार्रवाई करने का हमारा कोई इरादा नहीं है- ईरान

एक इजरायली अधिकारी ने विदेशी समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि पिछले सप्ताह मिसाइलों और ड्रोन से हुई बमबारी के जवाब में इजरायल ने शुक्रवार तड़के ईरान पर हमला किया. यह स्पष्ट नहीं है कि हमले से कितना नुकसान हुआ, लेकिन इसका उद्देश्य यह संकेत देना था कि इजरायल के पास ईरान के भीतरी हिस्सों में हमला करने की क्षमता है. इधर, तेहरान ने माना ​है कि उसके इस्फहान शहर को इजरायल द्वारा निशाना बनाया गया और यहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास तीन विस्फोट हुए. हालांकि, ये हमले मिसाइल से नहीं बल्कि मिनी ड्रोन से किए गए. ईरान ने कहा कि उसका जवाबी कार्रवाई करने का कोई इरादा नहीं है. इससे दोनों देशों के बीच तनाव युद्ध में तब्दील न होकर, यहीं तक रुकने के आसार हैं.

इजरायल ने ईरान के इस्फहान शहर पर किया ड्रोन अटैक

ईरान के हमले के बाद इजरायल ने काउंटर अटैक की तैयारी शुरू की. उसने शुक्रवार रात ईरान के इस्फहान शहर को निशाना बनाया और बमबारी की. ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि इजरायल ने इस्फहान शहर पर मिनी ड्रोन से हमले किए थे, जिसमें कोई नुकसान या हताहत नहीं हुआ. इस बीच रिपोर्ट्स आ रही हैं कि इजरायल ने ईरान पर हमले से करीब 24 घंटे पहले अमेरिका को इसकी जानकारी दे दी थी. अमेरिका ने जी-7 समूह के विदेश मंत्रियों से शुक्रवार को कहा कि ईरान में ड्रोन हमले के बारे में इजरायल से उसे ‘आखिरी क्षणों में’ सूचना मिली थी, लेकिन वॉशिंगटन ने इस कार्रवाई में हिस्सा नहीं लिया.

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