भारत जैसे विकासशील देशों के सामने आबादी और बेरोजगारी बड़ी चुनौती है। कोरोना महामारी जैसी समस्याओं के चलते देश में बेरोजगारों की संख्या काफी बढ़ गई है। इस बीच एक नया आर्थिक सर्वे सामने आया है, जिसके आंकड़े बेहद हैरान करने वाले हैं। इसमें बताया गया है कि साल 2022 में असम में रोजगार कार्यालयों में करीब 10 लाख पढ़े-लिखे युवाओं ने पंजीकरण कराया है। जबकि पिछले वर्ष में यह संख्या महज 1.4 लाख थी। आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि स्थिती कितनी बदतर हो गई है।
पढ़े-लिखे युवा बेरोजगार
2023-2024 के लिए जारी आर्थिक सर्वे में राज्य के सामने एक बड़ी चुनौती बताते हुए कहा गया है कि नौकरी चाहने वालों में सबसे अधिक संख्या पढ़े-लिखे युवाओं की है। केवल एक साल के अंदर सात गुना से भी अधिक नए पंजीकरण हुए हैं।
रोजगार कार्यालय के रजिस्टर के अनुसार, साल 2022 में शिक्षित बेरोजगारों की संख्या 9,83,093 थी, जबकि साल 2021 के दौरान यह संख्या 1,37,865 थी।
इतनी हुई वृद्धि
बजट सत्र के दौरान असम विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट में जोर देकर कहा गया है कि 2021 की तुलना में 2022 में नौकरी चाहने वालों की संख्या में वृद्धि हुई है। बताया गया कि रोजगार कार्यालयों में पंजीकरण के अनुसार, 2021 में शिक्षित नौकरी चाहने वालों की कुल संख्या 18,05,441 थी, जबकि 2020 के दौरान यह 17,46,671 थी, जिससे 3.36 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों में बेरोजगारी दर जो काम के लिए उपलब्ध थे, लेकिन काम नहीं मिल सका, पूरे देश में 3.2 प्रतिशत की तुलना में 2022-23 के दौरान असम में 1.7 प्रतिशत थी।
सर्वे में कहा गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 1.5 प्रतिशत है जबकि शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 2022-23 के दौरान असम में 6.1 प्रतिशत है। अखिल भारतीय स्तर पर बेरोजगारी की दर इसी अवधि में ग्रामीण क्षेत्रों में 2.4 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 5.4 प्रतिशत रही।
सरकार जुटी समस्या सुलझाने में
राज्य में बेरोजगारी की बढ़ती समस्या को देखते हुए, असम सरकार ने बोझ को कम करने के लिए कुछ सकारात्मक पहल की है।रिपोर्ट में कहा गया है कि एक लाख बेरोजगार युवाओं को नौकरियां देने के लिए प्रक्रिया चल रही है।









