तारीख पर तारीख जानिए अयोध्या विवाद

वर्षों से चले आ रहे राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की विशेष पीठ ने सुनवाई पूरी कर ली है। अब 17 नवंबर तक फैसला सुना दिया जाएगा। पढ़िए अब तक क्या-क्या हुआ –

डालिए अयोध्या से जुड़े इस विवाद को तारीखों के आईने में

528 : अयोध्या में एक ऐसे स्थल पर मस्जिद का निर्माण किया गया जिसे हिदू भगवान राम का जन्म स्थान मानते हैं। समझा जाता है कि मुगल सम्राट बाबर ने ये मस्जिद बनवाई थी जिस कारण इसे बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता था।                                                         1853 : हिदुओं का आरोप है कि भगवान राम के मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण हुआ। इस मुद्दे पर हिदू और मुसलमानों के बीच पहली हिसा हुई।

1859 : ब्रिटिश सरकार ने तारों की एक बाड़ खड़ी कर विवादित भूमि के आंतरिक और बाहरी परिसर में मुस्लिमों और हिदुओं को अलग- अलग प्रार्थना की इजाजत दे दी।                                                                                                                                             1885: मामला पहली बार अदालत में पहुंचा। महंत रघुवरदास ने फैजाबाद अदालत में बाबरी मस्जिद से लगे रामचबूतरा पर राम मंदिर के निर्माण की इजाजत के लिए अपील दायर की।

23 दिसंबर, 1949 : करीब 50 हिदुओं ने मस्जिद के केंद्रीय स्थल पर कथित तौर पर भगवान राम की मूर्ति रख दी। इसके बाद उस स्थान पर हिदू नियमित रूप से पूजा करने लगे। मुसलमानों ने नमाज पढ़ना बंद कर दिया।                                                                                  16 जनवरी, 1950 : गोपाल सिह विशारद ने फैजाबाद अदालत में एक अपील दायर कर रामलला की पूजा-अर्चना की विशेष इजाजत मांगी। उन्होंने वहां से मूर्ति हटाने पर न्यायिक रोक की भी मांग की।

05 दिसंबर, 1950 : महंत परमहंस रामचंद्र दास ने हिदू प्रार्थनाएं जारी रखने और बाबरी मस्जिद में राम मूर्ति को रखने के लिए मुकदमा दायर किया।                                                                                                                                                                                    17 दिसंबर, 1959: निर्मोही अखाड़ा ने विवादित स्थल हस्तांतरित करने के लिए मुकदमा दायर किया।

18 दिसंबर, 1961: उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने विवादित स्थल के मालिकाना हक के लिए मुकदमा दायर किया।                               1984: विश्व हिदू परिषद (वीएचपी) ने विवादित स्थल के ताले खोलने और एक विशाल मंदिर के निर्माण के लिए अभियान शुरू किया। एक समिति का गठन किया गया।

1 फरवरी, 1986 : फैजाबाद जिला न्यायाधीश ने विवादित स्थल पर हिंदुओं को पूजा की इजाजत दी। ताले दोबारा खोले गए। नाराज मुस्लिमों ने विरोध में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन किया।

जून 1989 : भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने वीएचपी को औपचारिक समर्थन देना शुरू कर मंदिर आंदोलन को नया जीवन दिया।

1 जुलाई, 1989 : भगवान रामलला विराजमान नाम से पांचवां मुकदमा दाखिल किया गया।

9 नवंबर, 1989 : तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने विवादित स्थल के नजदीक शिलान्यास की इजाजत दी।

25 सितंबर, 1990 : बीजेपी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली।

6 दिसंबर, 1992: हजारों की संख्या में कारसेवकों ने अयोध्या पहुंचकर विवादित ढांचा ढहा दिया, जिसके बाद सांप्रदायिक दंगे हुए। जल्दबाजी में एक अस्थाई राम मंदिर बनाया गया। प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने मस्जिद के पुनर्निर्माण का वादा किया।

जनवरी 2002 : प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने कार्यालय में एक अयोध्या विभाग शुरू किया, जिसका काम विवाद को सुलझाने के लिए हिदुओं और मुसलमानों से बातचीत करना था।

अप्रैल 2002 : अयोध्या के विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर उच्च न्यायालय के तीन जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू की।

मार्च-अगस्त 2003 : इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अयोध्या में खोदाई की।

जुलाई 2009 : लिब्रहान आयोग ने गठन के 17 साल बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिह को अपनी रिपोर्ट सौंपी।

30 सितंबर 2010 : इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

21 मार्च 2017 : राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की पेशकश की है। चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने कहा है कि अगर दोनों पक्ष राजी हो तो वो कोर्ट के बाहर मध्यस्थता करने को तैयार हैं।

11 अगस्त 2017: सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू।

आठ फरवरी 2018 : मुख्य पक्षकारों को पहले सुने जाने का फैसला।

27 सितंबर 2018 : नमाज के लिए मस्जिद अनिवार्य नहीं का फैसला।

26 फरवरी 2019 : सुप्रीम कोर्ट ने मामले में मध्यस्थता के जरिए विवाद सुलझाने की सलाह दी और कहा कि अगर आपसी सुलग की 1 फीसदी भी संभावना है तो मध्यस्थता होनी चाहिए।

06 मार्च 2019: मुस्लिम पक्ष मध्यस्थता के लिए तैयार हुआ। हिंदू महासभा और रामलला पक्ष ने आपत्ति दर्ज करवाई।

08 मार्च 2019: सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता पैनल गठित किया, जिसमें श्री श्री रविशंकर, श्रीराम पंचू और जस्टिस एफएम खलीफुल्ला शामिल।

02 अगस्त 2019: मध्यस्थता पैनल की रिपोर्ट देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह अयोध्या केस नहीं सुलझाया जा सकता। 5 अगस्त से केस में प्रतिदिन सुनवाई होगी।

06 अगस्त 2019: अयोध्या केस की सुप्रीम कोर्ट में प्रतिदिन सुनवाई शुरू।

16 अक्टूबर 2019: सुप्रीम कोर्ट ने केस सुनवाई पूरी की। अब सीजेआई रंजन गोगोई की रिटायमेंट तारीख यानी 17 नवंबर तक फैसला सुना दिया जाएगा। 

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