कैबिनेट मीटिंग के 24 घंटे के अंदर ही कलेक्टर की छुट्टी, प्रशासनिक उदासीनता और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी पड़ी भारी 

जबलपुर। जबलपुर में संभागीय समीक्षा बैठक और कैबिनेट मीटिंग के 24 घंटे के अंदर ही यहां के कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन की छुट्टी कर दी गई। उनकी जगह अब 2010 बैच के आईएएस दीपक कुमार सक्सेना को जबलपुर का नया कलेक्टर बनाया गया है। जबलपुर से हटाए गए कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन को भी अपने उदासीन रवैया और आम जनता से दूरी बनाए रखने का खामियाजा भुगतना पड़ा। अपने पिछले 1 साल के कार्यकाल में जबलपुर कलेक्टर ने जिले में कुछ भी ऐसा नहीं किया जिसके लिए उन्हें याद किया जाए। 

बल्कि इससे उलट जबलपुर में कई ऐसी घटनाएं, दुर्घटना हुई जिनके लिए जरूर कलेक्टर के ऊपर उंगलियां उठी। कहा जाता है कि जबलपुर कलेक्टर रहते हुए सौरभ कुमार सुमन ने अपने आप को न केवल मीडिया से दूर रखा, बल्की जनप्रतिनिधि और जनता की भी अनदेखी की उसी का खामियाजा है कि, नई सरकार आते ही साहब को चलता कर दिया गया। सीएम डॉ मोहन यादव ने एक साथ कई कलेक्टर के तबादले कर बता दिया की, जनता और जनप्रतिनिधि की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सौरभ कुमार सुमन के फेलियर 

ऐसे कई मौके आए जब जबलपुर के कलेक्टर रहे सौरभ कुमार सुमन की भारी लापरवाही का ताजा उदाहरण धान खरीदी में सबसे बड़े घोटाले है, जब कलेक्टर की नाक के नीचे पूरा खेल होता रहा और उन्होंने कुछ नहीं किया। इस मामले में सौरभ कुमार सुमन की नाकामयाबी ही कही जाएगी की धान खरीदी घोटाले की जांच करने भोपाल से अधिकारियों की टीम को आना पड़ा और जांच के बाद कई अधिकारी सस्पेंड किए गए। सवाल उठे कि धान उपार्जन समिती का अध्यक्ष कलेक्टर होता है फिर उसपर कार्रवाई क्यों नहीं। 

हाल ही में मटर के किसानों का आंदोलन भी साहब की नाकामयाबी की फेहरिस्त का एक और नतीजा रहा कि, किसानों को अपनी ही फसल के भुगतान के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा और उसका ठीकरा कृषि उपज मंडी के सचिव पर फोड़ा गया। 26 जनवरी 2023 को हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम की 5 करोड़ से ज्यादा की फाइल की नोटशीट कलेक्टर कार्यालय गायब हो गई और साहब को पता नहीं चला आलम ये रहा कि मामले की एफआईआर थाने में दर्ज करानी पड़ी। हर मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई में भी उनकी उदासीनता नजर आने लगी थी, वर्ना इससे पहले हर मंगलवार को कलेक्टर ऑफिस में पैर रखने जगह नहीं होती थी लेकिन वही कलेक्टर कार्यालय जनसुनवाई में खाली खाली सा नजर आने लगा । प्रधानमंत्री की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक पीएम आवास योजना में भी उनकी कभी उतनी दिलचस्पी दिखाई नहीं दी।

नए सीएम के आदेश का भी उल्लघंन 

नए सीएम डॉ मोहन यादव ने प्रदेश भर में साउंड पॉल्यूशन कम करने , खुले में मांस की बिक्री को लेकर काम करने के निर्देश दिए। लेकिन सौरभ कुमार सुमन ने कलेक्टर रहते हुए इस दिशा में भी वैसे कड़े कदम नहीं उठाए, ध्वनि प्रदूषण के लिए  सिवाय एक बैठक कर इतिश्री के अलावा कोई भी पहल नजर नहीं आई।

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