चुनाव का टेंडर चाहिए तो छोड़नी पड़ेगी नेतागिरी! निर्वाचन अधिकारियों ने रखी ये बड़ी शर्त

मध्य प्रदेश में इन दिनों चुनावी माहौल बना हुआ है. निर्वाचन कार्य से जुड़ी प्रशासनिक टीम की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है. इसी कड़ी में सूबे के 5 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा निकाले गए टेंडर इस समय चर्चा में है. उन्होंने टेंडर में जो शर्त रखी है, उसके मुताबिक अगर किसी को ठेका चाहिए तो उसे नेतागिरी से तौबा करनी होगी.

दरअसल, किसी दल के कार्यकर्ता, नेता या सदस्य या फिर उनसे जुड़े किसी भी व्यक्ति से चुनाव आयोग चुनावी सामग्री नहीं खरीदेगा. सागर, विदिशा, शाजापुर, उज्जैन और नीमच जिला निर्वाचन अधिकारी ने चुनाव के दौरान उपयोग होने वाली स्टेशनरी, सील, बैनर प्रिंटिंग आदि की खरीदी के टेंडर में यह शर्त रखी है.

कहा जा रहा है कि इस हिसाब से राज्य में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और उनसे जुड़े लोगों की संख्या को जोड़ लें तो आधी आबादी टेंडर में भाग नहीं ले पाएगी. पांचों जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों ने टेंडर की शर्त में लिखा है कि वही सप्लायर या कॉन्ट्रैक्टर टेंडर भरेगा, जिसके परिवार के सदस्य या कर्मचारी राजनीतिक दल से जुड़े न हों. इसके साथ ही उसका उम्मीदवार से भी जुड़ाव या संबंध नहीं होना चाहिए. वैसे इसे थोड़ा बचकाना भी कहा जा रहा है. क्योंकि, अभी तक किसी भी राजनीतिक दल ने अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है जबकि, कई जिलों में टेंडर भरने की अंतिम तिथि 31 जुलाई तय की गई है. 

ये हैं टेंडर की प्रमुख शर्तें 
टेंडर में लिखा गया है कि निविदाकार या उसके कर्मचारी, परिवार के सदस्यों का राजनीतिक दल अथवा अभ्यर्थी से कोई संबंध नहीं होना चाहिए. इसी तरह निविदा के साथ टेक्निकल बिड, फाइनेंशियल बिड, सहमति पत्र, ब्लैक लिस्टेड न होने के प्रमाण- पत्र, राजनीतिक दल से संबंध नहीं रखने का प्रमाण पेश करना अनिवार्य होगा. 

विदिशा के जिला निर्वाचन अधिकारी और कलेक्टर उमाशंकर भार्गव के मुताबिक निविदाकार से केवल सेल्फ डिक्लेरेशन मांगा गया है. भविष्य में कोई शिकायत होती है तो सावधानी बरतने के लिए यह शर्त जोड़ी है. पिछले चुनाव में भी यह शर्तें थीं. हालांकि, इस मामले में राज्य निर्वाचन आयोग की राय थोड़ी ही जुदा है. मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन के मुताबिक राज्य स्तर से जो भी टेंडर होते हैं, उसमें ऐसी किसी भी तरह की शर्त नहीं रखी जाती है. 

यहां बताते चलें कि मध्य प्रदेश में नवम्बर में विधानसभा चुनाव होंने की संभवना है. निर्वाचन आयोग इसी के मुताबिक तैयारी कर रहा है. विधानसभा चुनाव से पहले हर जिले में निर्वाचन सामग्री की खरीदी होनी है. इसके लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों ने टेंडर जारी किए हैं. हर जिले में तकरीबन 25 से 30 लाख रुपए तक की खरीदी होनी है. चुनाव के दौरान उपयोग होने वाली स्टेशनरी, सील, बैनर प्रिंटिंग आदि का टेंडर अभी से फाइनल किया जा रहा है.

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