कम होती मजदूरी, बिगड़ती सेहत और काम में गिरावट – भीषण गर्मी का खामियाजा भुगत रही है ग्रामीण भारत की कामकाजी आबादी

महोबा (उ.प्र.)। बुंदेलखंड देश के सबसे अधिक सूखे इलाकों में से एक है। यहां तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है और लगातार सूखे का कारण बनता है। यहां रहने वाले तमाम लोग, चाहे वे किसान हों या दिहाड़ी मजदूर, भीषण गर्मी में काम करने के लिए मजबूर हैं। उनके पास काम करते रहने के अलावा कोई चारा नहीं है, क्योंकि काम न करने का मतलब है दाने-दाने के लिए मोहताज हो जाना। अभी तो अप्रैल का महीना है, लेकिन भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश (जहां महोबा स्थित है) में भीषण गर्मी का प्रकोप देखा जा रहा है। अभूतपूर्व गर्मी के कारण देश के कई अन्य हिस्सों में कुछ राज्यों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं। आईएमडी ने हीटवेव अलर्ट जारी किया है और लोगों को घरों के अंदर रहने की चेतावनी दी है।

ग्रामीण भारत में गर्म हवाएं कहर बरपा रही है। खेतिहर मजदूरों के लिए यह बेहद मुश्किल समय है। चिलचिलाती धूप में खेतों में काम या फिर अपनी फसलों की देखभाल करने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा है। जानकारों का कहना है कि ये स्थिति अभी लंबे समय तक बनी रहने वाली है।

चिलचिलाती दुपहरी में पसीने से तरबतर गंगा चरण रैकवार अपने खेत में काम कर रहे थे। प्यास से जब गला सूखने लगा तो धूप से कुछ देर राहत पाने के लिए वह एक पेड़ की ओर चल पड़े। लमोरा गाँव के इस 17 साल के बटाईदार किसान ने खेत में प्लास्टिक के पाइप से पानी पिया और गमछे से अपने चेहरे का पसीना पोंछा। बमुश्किल कुछ मिनट ही आराम किया होगा, वह दो बीघे (आधा हेक्टेयर) में फैले अपने खेत में काम करने के लिए चल दिए। उनका 16 वर्षीय भाई मोहित रैकवार और उनकी 40 साल की मां हरिकुंवर रैकवार भी वहीं उनके साथ भरी दुपहरी में खेतों में काम कर रहे थे। अपने भाई और मां के साथ मेंथा की फसल लगाने में व्यस्त गंगा चरण के लिए ज्यादा देर आराम करना संभव नहीं था।

रैकवार को पता था कि मेंथा की गुणवत्ता और मात्रा के आधार पर वह अपनी फसल से कितना पैसा कमा पाएंगे। और वैसे भी बटाईदार किसान होने के नाते उन्हें अपनी फसल का आधा हिस्सा खेत के मालिक को भी देना था। उनकी ओर से किसी भी तरह की देरी या लापरवाही से नुकसान हो सकता है, इसलिए आराम करने का तो सवाल ही नहीं उठता, अब भले ही कितनी भी गर्मी क्यों न हो।“ऐसा लगता है जैसे गर्म पानी मुझे बीमार कर देगा। सिर्फ दोपहर के खाने के लिए हम एक घंटे के लिए रुकते हैं, वरना तो हमें पूरे दिन धूप में खड़ा रहना पड़ता है, “उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के महोबा जिले के रहने वाले गंगा चरण ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा।

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