मध्‍य प्रदेश में कांग्रेस के मिशन-2023 की बागडोर कमल नाथ और दिग्विजय के हाथ

भोपाल ।   मध्य प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की आहट सियासी गलियारों में स्पष्ट महसूस होने लगी है। भाजपा में जहां केंद्रीय स्तर पर दिग्गजों के दौरे हो रहे हैं, तो कांग्रेस में कमल नाथ और दिग्विजय सिंह खासे सक्रिय हो गए हैं। 2018 के चुनावी रण में भाजपा को सत्ता से बाहर करने वाली यह जोड़ी एक बार फिर चुनावी जीत की बिसात बिछाने में जुट गई है। कार्यकर्ताओं को निर्णायक लड़ाई का संदेश देने के साथ ही राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को चुनावी तैयारियों से जोड़कर सफल बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। बतौर विपक्ष कांग्रेस सत्ता के जादुई आंकड़े के सबसे करीब मध्य प्रदेश में ही है। प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ गोपनीय तौर पर सर्वे भी करा रहे हैं, जिसमें स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि जीतने की प्रबल संभावनाओं वाले चेहरों को ही कांग्रेस टिकट देगी। सत्ता वापसी की उम्मीदों को लेकर पूरे जोश और उत्साह से भरी कमलनाथ और दिग्विजय की जोड़ी संगठन को काफी हद तक नए सिरे से गढ़ रही है कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दे दिया गया है कि यह समय ‘करो या मरो का” है।पहली बार कांग्रेस अपने संगठन में ‘संगठन मंत्री’ तैनात करने जा रही है। पार्टी ने जिले से विधानसभा स्तर तक प्रभारियों की नियुक्ति भी कर दी है। बूथ से लेकर पन्ना प्रभारी बनाए जा रहे हैं। उद्देश्य स्पष्ट है कि कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जाए, वहीं जो सिर्फ नाम तक सीमित हैं, उन कार्यकर्ताओं को ‘कमजोर कड़ी” मानते हुए अलग छांट दिया जाए। संगठन के प्रमुख पदों पर नियुक्ति में भी सिफारिशों से ज्यादा प्रदर्शन पर ध्यान दिया जा रहा है। खास बात है कि पहली बार कांग्रेस की बैठकों में मतदाता सूची को लेकर मंथन किया जा रहा है।

राहुल की पदयात्रा से उम्मीदें

कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा सात सितंबर से शुरू होगी, जो मध्य प्रदेश सहित लगभग 12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों से होते हुए करीबन 3500 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। राहुल गांधी की पदयात्रा का इस्तेमाल भी कांग्रेस मालवांचल में जनाधार मजबूत करने में करेगी। 2018 के चुनाव से पहले मंदसौर में हुई राहुल गांधी की सभा ने कांग्रेस की उम्मीदों को मजबूत किया था। किसानों से किए वादे को कांग्रेस की जीत का अहम कारण माना जाता है। राहुल गांधी की पदयात्रा की सफलता और वहीं से विधानसभा चुनाव के लिए सक्रियता कांग्रेस की इस समय सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस संदर्भ में कमल नाथ और दिग्विजय सिंह ने पार्टी स्तर पर कार्यकर्ताओं को स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस ‘अभी नहीं तो कभी नहीं” की तर्ज पर चुनाव लड़ेगी।

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