भोपााल। बीजेपी भले ही दावा कर रही है कि, उसने नगर सरकार के चुनावों में 85 प्रतिशत जीत हासिल कर ली है, लेकिन 16 में से 7 नगर निगमों की हार ने पार्टी के लिए 2023 के खतरे ही घंटी बजा दी है. सात साल पहले बीजेपी ने 16 नगर निगमों में क्लीन स्वीप किया था. हाल ही में आए नतीजों से प्रदेश के बड़े दिग्गजों की नींद और उनके चेहरे की खुशी उड़ा दी है. 7 नगर निगमों में कुल मिलाकर 46 विधानसभा आती हैं. जिसमें बीजेपी को पटखनी मिली है.
सत्ताधारी पार्टी की उड़ी नींद: ग्वालियर चंबल महाकौशल से बीजेपी साफ हो गई है. सिंगरौली के साथ साथ विंध्य में भी भारी झटका लगा है. रीवा में 8 विधानसभा है. इस क्षेत्र की 2 नगर निगम बीजेपी से छिन गई हैं. हालांकि बुंदेलखंड, मालवा निमाड़ में जनता ने अभी भी बीजेपी पर ही भरोसा जताया है. 7 नगर निगम में 46 विधानसभा हैं. जहां पर बीजेपी डेंजर जोन में आ चुकी है. हालांकि पिछली बार विधानसभा में बीजेपी को यहां पर हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन उपचुनाव में कांग्रेस से आए मंत्री और विधायकों में ज्यादातर जीत गए थे. कांग्रेस को 28 में से सिर्फ 9 सीटें ही मिली थी, लेकिन नगर निगम के हालिया नतीजों ने सत्ताधारी पार्टी की नींद उड़ा दी है.
कमलनाथ का तंज: 2018 के चुनावों में बीजेपी को 109 सीटें ही मिली थी. कांग्रेस ने सरकार बना ली थी. अब नगर निगमों की हार ने फिर बीजेपी के लिए 2023 के समीकरण बिगाड़ दिए हैं. कांग्रेस को नगर निकायों में मिली सीटों से संतोष है. कमलनाथ कहते हैं हम 2014 में 16 नगर निगम में जीरो पर थे. अब खाते में 5 सीट आ गई है. बुरहानपुर में भी बीजेपी मार्जिन से ही जीती है. वजह रही ओवैसी की पार्टी का चुनाव में उतरना. देखा जाए तो यहां भी ओवैसी की वजह से बीजेपी को जीत मिली है नहीं तो कांग्रेस यहां भी नगर निगम में जीत हासिल कर लेती. हार के बावजूद कमलनाथ कान्फीडेंट दिखाई दे रहे हैं. बीजेपी पर तंज भी मार रहे हैं कि बच्चा किसी और के जन्म ले रहा है, लेकिन मिठाईयां बीजेपी बांट रही है.









