परिवारवाद पर समझौता नहीं, चाहे पार्टी को नुकसान ही क्यों न हो: जेपी नड्डा

भोपाल। मध्य प्रदेश के 2 दिन के दौरे पर आए बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भोपाल के ईदगाह हिल्स स्थित गुरुद्वारा नानक टेकरी साहिब पहुँचकर मत्था टेका. इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान साथ रहे. माथा टेकने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि, ‘मैं यहां धर्मग्रंथों को नमन करता हूं और अरदास करता हूं कि आपके आर्शीवाद से समाज में खुशहाली और विकास हो. उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ हमारे सिखों ने जद्दोजहद की और उन्होंने जद्दोजहद से गुरुद्वारा को महंतों से छुड़ाकर प्रबंध समिति को सौंपने का काम किया. उस समय यहां अंग्रेजों ने जो अन्याय किया, उसके खिलाफ हमारे सिखों ने मुंह तोड़ जवाब दिया.

सिखों को रिझाने गुरुद्वारे गए नड्डा: बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा जहां भी जाते है अक्सर देखा जाता है कि वे गुरुद्वारा जरूर पहुंचते हैं. भोपाल में भी उन्होंने अपने दौरे की शुरुआत गुरुद्वारे में माथा टेककर की. जेपी नड्डा से सवाल पूछा गया कि ‘2023 में शिवराज मुख्यमंत्री रहेंगे’. इस पर उन्होनें कहा कि काम अच्छा कर रहे हैं, लेकिन ये फैसला संसदीय बोर्ड करता है. उन्होनें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की तारीफ करते हुए कहा कि हमारे यहां संसदीय बोर्ड में फैसला होता है, किस को क्या जिम्मेदारी दी जाएगी. उन्होंने कहा कि बार-बार एक ही प्रश्न क्यों करते हैं, हम बार-बार पेड़ उखाड़कर क्यों देखते हैं, पेड़ लगा कि नहीं लगा. बकायदा पौधा लगा हुआ है, ठीक ठाक पौधा चल रहा है, सब काम में जुटे हुए हैं. 2023 में तो पार्लियामेंट्री बोर्ड तय करता है, लेकिन शिवराज के नेतृत्व में अच्छी सरकार चल रही है.

बीजेपी में नहीं चलेगा परिवारवाद: बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने परिवारवाद को लेकर दो टूक कहा कि, मध्य प्रदेश के उपचुनाव में हमें नुकसान उठाना पड़ा. लेकिन हमने परिवारवाद को लेकर समझौता नहीं किया. हालांकि मुझे मुख्यमंत्री शिवराज सहित संगठन के लोगों ने कहा कि यदि परिवार वालों को टिकट नहीं दिया गया तो पार्टी को नुकसान होगा. नड्डा की इस बात से साफ हो गया है कि, संगठन नेता पुत्रों को पार्टी टिकट देने के मूड में नही है. लेकिन जहां तक 75 की उम्र के क्राइटेरिया की बात है, तो हम युवाओं को मौका देंगे. इससे ये भी साफ हो गया कि उम्रदराज नेताओं को अब घर ही बैठना होगा.

सीटें गंवाने की कीमत ज्यादा से ज्यादा क्या होगी?: बीजेपी अध्यक्ष ने तेलगू देशम पार्टी, नेशनल कांफ्रेंस, लोक दल, शिरोमणि अकाली दल, शिवसेना, राकांपा, द्रमुक और अन्य को वंशवादी राजनीति का उदाहरण बताते हुए कहा कि भगवा पार्टी पारिवारिक राजनीति के खिलाफ है और इस सिद्धांत पर कायम रहेगी. नड्डा ने यह भी कहा कि जहां तक ​​पार्टी से लंबे समय से जुड़े भाजपा नेताओं के बेटों को प्रतिनिधित्व देने की बात है तो भाजपा नीति के अनुसार पार्टी कार्यकर्ताओं को बढ़ावा देगी. वंशवादी राजनीति की अवधारणा को समझना आवश्यक है जिसमें पिता अध्यक्ष होता है और पुत्र महासचिव (किसी दल में) होता है. उन्होंने कहा कि भाजपा शासित मध्य प्रदेश में कम से कम दो उपचुनाव जीतती, लेकिन पार्टी ने अपने रुख (वंशवाद की राजनीति का विरोध) से समझौता नहीं किया.

मध्य प्रदेश में दो से तीन उपचुनाव हुए. उनके परिणाम बहुत अनुकूल नहीं रहे. हम वो सीटें जीत सकते थे, हमारे (राज्य इकाई) अध्यक्ष और मुख्यमंत्री यहां बैठे हैं. उन्होंने हमें बताया था कि उन सीटों (जहां उपचुनाव हुए थे) मुश्किल में होंगे, लेकिन हमने उनसे साफ तौर पर कहा कि रहने दो. यह एक नीति है और हमें इसका पालन करना होगा. कभी-कभी हमें ऑपरेशन करना पड़ता है और डेटॉल लगाकर चीजों को ठीक करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इससे थोड़ा दर्द होता है लेकिन हमें पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र को बनाए रखना होगा. नड्डा ने कहा कि भाजपा हर जगह (वंशवाद की राजनीति का मनोरंजन नहीं करने के लिए) इस नीति का पालन करेगी.

उत्तर प्रदेश में भी इस नीति का पालन किया: उन्होंने कहा, ‘मध्य प्रदेश में भी ऐसे कई व्यक्ति (वंश) हैं, हमें संवाद शुरू करके उन्हें समझाना होगा और एक परिवार में सिर्फ एक व्यक्ति को काम देकर आगे बढ़ना होगा. कोई भी कार्यकर्ता पार्टी में नहीं आएगा, अगर उसे एक परिवार द्वारा चलाया जाएगा. उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में भी हमें पता था कि हम एक सीट हारेंगे लेकिन हमने पार्टी के एक कार्यकर्ता को टिकट दिया. इस सवाल का जवाब देते हुए कि क्या लंबे समय से पार्टी में काम कर रहे भाजपा नेताओं के परिवार के सदस्यों को अगले चुनाव में टिकट दिया जा सकता है, नड्डा ने कहा कि यह अच्छी बात है कि वे पार्टी के लिए काम कर रहे हैं और वह प्रेरित करेंगे, उन्हें और उन्हें भी बढ़ाओ. लेकिन जहां तक ​​उन्हें (नेताओं के बेटों को) प्रतिनिधित्व देने का सवाल है, नीति के हिसाब से हम पार्टी कार्यकर्ता को बढ़ावा देंगे और उन्हें (नेताओं के बेटे) हतोत्साहित करेंगे.

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