भोपाल। कोरोना के मामले घटने के बाद संभावना जाहिर की जा रही थी कि रेलवे अब ट्रेनों को स्पेशल की बजाय नियमित ट्रेनों के रूप में चलाने लगेगा, लेकिन त्योहार पर भी भारतीय रेल का सफर महंगा है। सरेआम स्पेशल ट्रेन के नाम पर यात्रियों की जेब काटी जा रही है, जिसमें स्लीपर के एक आरक्षित टिकट पर 20 रुपए से लेकर तीन सौ रुपए तक ज्यादा लग रहे हैं।
पूरे देश में अभी भी स्पेशल ट्रेनें ही चलाई जा रही हैं। ये ट्रेनें नाम की स्पेशल हैं, लेकिन पुराने समय पर ही संचालित की जा रही है और यात्रा का समय भी उतना ही लग रहा है, जितना पहले लगता था। यानी रेलवे अलग से कोई सुविधा यात्रियों को इन ट्रेनों में नहीं दे रहा है, फिर भी किराया ज्यादा ले रहा है। भोपाल से सभी ट्रेनें स्पेशल के रूप में ही चलाई जा रही हैं, जिसमें यात्रियों को ज्यादा किराया देकर सफर करना पड़ रहा है। कुछ ट्रेनों में जनरल कोच में 20 रुपए ज्यादा लिए जा रहे हैं तो आरक्षित स्लीपर कोच में 30 रुपए तक अधिक लिए जा रहे हैं, वहीं एसी कोच में यह किराया 500 रुपए अधिक वसूला जा रहा है। पहले संभावना थी कि त्योहारों को देखते हुए रेलवे इन ट्रेनों में नियमित ट्रेनों का किराया ही लेगा, लेकिन रेलवे ने यात्रियों को किसी प्रकार की राहत नहीं दी।
यात्रियों की जेब पर ऐसे पड़ रहा असर
सामान्य श्रेणी के किराये में भी रेलवे स्पेशल और आरक्षण का चार्ज वसूल कर रहा है तो स्लीपर कोच में स्पेशल ट्रेन के नाम पर वसूली की जा रही है। इंदौर से मुंबई जाने के लिए अवन्तिका एक्सप्रेस में पहले स्लीपर कोच में 440 रुपए लगते थे, लेकिन इसमें 15 रुपए ज्यादा लग रहे हैं। यही स्थिति दिल्ली इंटरसिटी की है, वहीं सेकंड और थर्ड एसी में 35 रुपए ज्यादा देना पड़ रहे हैं। त्योहारों पर सबसे ज्यादा यात्रियों से भरी रहने वाली पटना एक्सप्रेस में स्पेशल और त्योहार स्पेशल के नाम पर ज्यादा किराया वसूला जा रहा है। सबसे ज्यादा किराया इसी ट्रेन में लग रहा है। इस ट्रेन के स्लीपर कोच में 195 रुपए तक ज्यादा देना पड़ रहे हैं। सामान्य दिनों में इस ट्रेन में 565 रुपए किराया रहता है, लेकिन वर्तमान में 755 रुपए किराया देना पड़ रहा है, वहीं सेकंड एसी में 2 हजार 225 की बजाय 2 हजार 705 तो थर्ड एसी में 1520 की बजाय 1950 रुपए देना पड़ रहे हैं।







