चीन में बिजली संकट से हमारे फार्मा उद्योगों को लगा झटका

  • दवाइयां बनाने के कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि, उत्पादन में भी आएगी कमी
  • पैकिंग मटेरियल की आवक भी कम, अन्य उद्योगों पर भी होगा असर
  • भोपाल । कोयले के कमी के कारण चीन में उपजे बिजली संकट का असर हमारे देश के फार्मा उद्योग पर पड़ा शुरू हो गया है। दवाइयां बनाने में इस्तमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतों में पिछले एक महीने में डेढ़ से दो गुना तक वृद्धि हो गई है। कीमतों में वृद्धि के साथ ही दवाओं की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो कई दवाइयों का निर्माण बंद भी हो सकता है। चीन के बिजली संकट का भारत के फार्मा उद्योग पर सबसे अधिक असर इसलिए हो रहा है, क्योंकि आज भी देश में बनने वाली दवाओं के लिए 70 फीसदी कच्चा माल चीन से ही आता है।केंद्र और राज्य सरकारों के तमाम प्रयासों के बाद भी हम दवाइयों के कच्चे माल के मामले में आत्मनिर्भर नहीं हो सके हैं। खास बात यह है, कुछ दवाओं का कच्चा माल हमारे देश में बनता है, लेकिन उसके लिए भी हमें चीन के भरोसे रहना पड़ता है। उनके सहायक रसायन चीन से ही आयात होते हैं। 
    दो गुना तक बढ़ी कच्चे माल की कीमतें
    मप्र स्मॉल स्कैल मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के सचिव अमित चावला ने बताया, चीन में अगस्त के अंत से बिजली संकट शुरू हुआ था। इससे वहां की फैक्ट्रियों में बिजली कटौती शुरू हुई और उससे उत्पादन गिरने लगा। मांग अधिक होने से कच्चे माल की कीमतें दोगुना तक बढ़ गई हैं। सबसे अधिक इस्तमाल होने वाले पैरासिटामोल जो कुछ समय पहले तक करीब 650 रुपए प्रति किलो था, वह 950 रुपए कितो तक पहुंच गया है। आने वाले दिनों में 1200 रुपए तक होने की उम्मीद है। निमुस्लाइड 700 से बढ़कर 950 रुपए प्रति किलो हो गया है।
    पैकिंग मटेरियल की आपूर्ति नहीं
    दवा निर्माण से जुड़े रतन पांडे का कहना है, दवाओं के साथ ही चीन से आने वाले मेडिसिन के पैकिंग मटेरियल की कीमतों में भी दोगुना तक की वृद्धि हो गई है। एल्युमिनियमि फॉइल के मूल्य इस साल में 40 से 50 फीसदी तक बढ़ गए हैं। आपूर्ति की कमी के चलते दो महीने पहले तक इसके दाम 100 रुपए तक थे जो अब 200 रुपए तक पहुंच गए हैं। सिर्फ दवा निर्माण ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ी मशीनों की कीमतों में भी वृद्धि हो रही है।
    जीवन रक्षक दवाओं का निर्माण होगा प्रभावित
    लघु उद्योग भारती के हिमांशु शाह का कहना है, यदि कच्चे माल की आपूर्ति नहीं सुधरी तो आने वाले दिनों में जीवन रक्षक दवाओं का निर्माण भी प्रभावित होगा। मप्र में इंदौर दवा निर्माण के क्षेत्र में बड़ा हब है। बड़ी-छोटी मिलाकर 100 से अधिक दवा कंपनियां यहां अलग-अलग तरह की दवाएं बनाती हैं। कच्चे माल की कीमतें बढऩे से आम जनता को मिलने वाली दवाओं की कीमतों में भी वृद्धि होगी। सरकार को होने वाली दवाओं की आपूर्ति भी प्रभावित होगी।
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