पूरे देश में स्लीपर सेल तैयार करना चाहता था आइएस, गिरफ्तार आतंकियों जुफरी और अमीन ने उगले सनसनीखेज राज

नई दिल्ली।

इस्लामिक स्टेट (आइएस) पूरे भारत में स्लीपर सेल और कट्टर समर्थकों की फौज तैयार करने में जुटा था। आइएस के गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ में यह राज खुला है। एनआइए के अनुसार इन आतंकियों की देश में तत्काल किसी वारदात को अंजाम देने की योजना नहीं थी, बल्कि वे लंबी कार्ययोजना के तहत काम कर रहे थे। ये पाकिस्तान व अफगानिस्तान सीमा पर सक्रिय अपने आकाओं के साथ लगातार संपर्क में थे।

एनआइए ने किया पर्दाफाश

ध्यान देने की बात है कि ‘वायस आफ हिंद’ के नाम से एक आनलाइन पत्रिका निकालने वाले आइएस के माड्यूल का एनआइए ने पर्दाफाश किया था। इस सिलसिले में कर्नाटक के भटकल से जुफरी जौहर दामुदी और इसके सहयोगी अमीन जुहैब को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया था। जुफरी जौहर दामुदी अपनी पहचान बदल अबु हाजिर अल बदरी के नाम से सक्रिय था।

देश में स्लीपर सेल खड़ा करने की कोशिश

एनआइए के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार आतंकियों के पास कोई विस्फोटक सामग्री या हथियार बरामद नहीं हुआ। पूछताछ में जुफरी ने बताया कि उसे फिलहाल आइएस की प्रचार सामग्री को स्थानीय भाषाओं में छपवा कर अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और पूरे देश में स्लीपर सेल खड़ा करने का काम मिला था। जुफरी आइएस की अरबी में भेजे गई प्रचार सामग्री का मलयालम में अनुवाद करता था और इसके जरिये युवाओं को आइएस के लिए तैयार करता था।

पूरे देश में फैलाना चाहते थे नेटवर्क

जुफरी और अमीन से अब तक की पूछताछ से साफ हो गया है कि वे इंडियन मुजाहिदीन (आइएम) की तर्ज पर पूरे देश में संगठन खड़ा करना चाहते थे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इसके पीछे एक वजह जुफरी का आइएम के संस्थापक आतंकी भटकल भाइयों से संबंध होना है।

आइएस का ढांचा खड़ा करने की कोशिश

दरअसल जुफरी का भाई अदनान हसन दामुदी तीनों भटकल भाइयों यासीन, रियाज और इकबाल भटकल के संपर्क में था और 2017 में एनआइए ने उसे आइएस से जुड़े ही एक मामले में गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह जेल में है। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इंडियन मुजाहिदीन की कार्यप्रणाली और पूरे देश में फैलाव से वाकिफ जुफरी उसी तर्ज पर आइएस का ढांचा खड़ा करने की कोशिश में था।

आतंकी आकाओं से मिल रहे थे निर्देश

सूत्रों के अनुसार जुफरी छद्म नाम से पाकिस्तान व अफगानिस्तान की सीमा पर सक्रिय आइएस के आतंकी आकाओं के साथ लगातार संपर्क में था। वहीं से उसे प्रचार सामग्री भी मिलती थी। जिन आइएस आतंकियों में वह संपर्क में था, उसमें एजाज अहंगर उर्फ अबु उस्मान अल कश्मीरी भी शामिल है। ध्यान देने के बात है कि अल कश्मीरी, आइएस जम्मू-कश्मीर का वली (प्रमुख) भी है। पिछले साल काबुल में गुरुद्वारे पर हमले के बाद अफगानी सैन्य बलों ने इसे गिरफ्तार कर लिया था।

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