भारत समेत लगभग 130 देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा समर्थित वैश्विक न्यूनतम कर पर सहमति जताई है। इस समझौते पर भारत चीन जैसी आर्थिक महाशक्तियों के साथ बरमुडा और केमन आइलैंड जैसे टैक्स हैवेन देशों ने भी दस्तखत किए हैं। इसमें बहुराष्ट्रीय कंपनियों को कम दरों वाले देशों में अपने मुनाफे को स्थानांतरित करके कर देनदारी से बचने से रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर जारी प्रयास के बीच इन देशों ने कर लगाये जाने का समर्थन किया है।
आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) ने गुरुवार को समझौते की घोषणा की। समझौते में उन देशों में वैश्विक कंपनियों पर भी कर लगाने की बात कही गई है जहां वे ऑनलाइन कारोबार के जरिये मुनाफा कमाते हैं लेकिन भौतिक रूप से उनकी मौजूदगी नहीं है।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा कम-से-कम 15 प्रतिशत की दर से कर लगाने के प्रस्ताव के बाद यह समझौता सामने आया है। अमेरिकी प्रस्ताव से इस मामले में बातचीत में तेजी आई है।अब इस समझौते पर इस साल जी-20 देशों की बैठक में चर्चा की जाएगी। उम्मीद है कि इस संदर्भ में विस्तृत ब्योरा अक्टूबर में तैयार कर लिया जाएगा और समझौते को 2023 में लागू किया जाएगा।
पेरिस स्थित आर्थिक सहयोग और विकास संगठन द्वारा घोषित समझौता, उन देशों में सबसे बड़ी वैश्विक कंपनियों केमुनाफे के हिस्से पर कर लगाने का प्रविधान करता है जहां वे आनलाइन व्यापार तो करते हैं लेकिन उनकी कोई भौतिक उपस्थिति नहीं होती। फ्रांस के वित्त मंत्री ब्रूनो ले मायेर ने इसे इस सदी का सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कर समझौता बताया है।फ्रांस के नेतृत्व वाले देशों ने अमेजन, गूगल और फेसबुक जैसे अमेरिकी तकनीकी दिग्गजों पर एकतरफा डिजिटल कर लगाना शुरू कर दिया है। डील के तहत वे वैश्विक दृष्टिकोण के पक्ष में उन करों को वापस लेने के लिए सहमत होंगे जिन्हें अमेरिका द्वारा अनुचित व्यापार प्रथाओं के रूप में माना जाता है।







