तीन साल में अमेरिका और यूरोप जैसी होंगी भारत की सड़कें:केंद्रीय मंत्री गडकरी

नई दिल्ली; सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का काम ही उनकी पहचान है। देश के हर भाग में लोग उनके कार्यकाल में पिछले सात वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्गों में आए क्रांतिकारी परिवर्तन को महसूस कर रहे हैं। सड़क निर्माण की रफ्तार 37 किलोमीटर प्रतिदिन तक पहुंचाने वाले गडकरी ने चुनौतियों से निपटने की रणनीति के साथ-साथ देश में रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर सरकार के विजन के बारे में खुलकर बातचीत की।

2014 में तीन किमी प्रतिदिन से 2020 में 37 किमी प्रतिदिन सड़क बनाने के रिकार्ड तक कैसे पहुंचे?– 2014 में हमारी सरकार आने के समय बहुत सारे प्रोजेक्ट बंद पड़े थे। करीब तीन लाख 85 हजार करोड़ रुपये के 403 प्रोजेक्ट फंसे थे। इनमें से लगभग 40 प्रोजेक्ट को टर्मिनेट किया। अन्य में हमने कांट्रैक्टर, बैंक, जमीन अधिग्रहण से जुड़े विभाग, वन विभाग से बात कर समस्याओं का समाधान किया। इससे हमने भारतीय बैंकों को लगभग तीन लाख करोड़ रुपये के एनपीए से बचाया।

आपके अप्रोच में कोई अंतर था या सिर्फ काम की गति बढ़ाई?

– पहले 10 फीसद जमीन अधिग्रहण होते ही प्रोजेक्ट अवार्ड हो जाते थे। हमने निर्णय लिया कि 90 फीसद जमीन के अधिग्रहण के बाद ही प्रोजेक्ट अवार्ड होगा। यूटिलिटी शि¨फ्टग से लेकर वन व पर्यावरण क्लीयरेंस भी पहले लेने लगे। इससे अनावश्यक अवरोध खत्म हो गए। कांट्रैक्टर को पेमेंट समय पर देने लगे। लगातार फॉलोअप कर अड़चनों और समस्याओं को दूर करने लगे। इससे गति मिली और हमारी गाड़ी अब बुलेट ट्रेन की रफ्तार से दौड़ रही है।

कभी खराब सड़कों के लिए जाना जाने वाला भारत अब सड़क निर्माण में नए रिकार्ड बना रहा है

– हमने तीन विश्व रिकार्ड बनाए हैं। एक लेन के सोलापुर-बीजापुर मार्ग पर पहले 25 किमी बिटुमिन रोड को हमने 24 घंटे में तैयार किया। यह लिम्का बुक ऑफ इंडियन रिकार्ड में दर्ज हुआ है। दूसरा, मुंबई-दिल्ली हाईवे पर वडोदरा के पास चार लेन सीमेंट कंक्रीट का 2.5 किमी रोड 24 घंटे में बनाया। तीसरा, आज भारत 37 किमी प्रतिदिन सड़क बनाने वाला दुनिया का अकेला देश है। कभी अमेरिका में एक दिन में इससे ज्यादा सड़कें बनती थीं, लेकिन अब वहां सड़क निर्माण का काम धीमा हो गया है। हमारी उपलब्धि इसलिए भी बड़ी है कि बीता साल कोविड से प्रभावित था। मजदूर चले गए थे। समस्या गंभीर थी। इसके बावजूद हम 28 से 37 किमी प्रतिदिन तक पहुंच गए। अगले साल निश्चित तौर पर गति 40 किमी प्रतिदिन होगी।

चार लेन से शुरू कर ग्रीन एक्सप्रेस हाईवे तक पहुंचने का ख्याल कैसे आया?

– शुरू में हमने चार को छह और छह को आठ लेन किया। इसके बाद हमने ग्रीन एक्सप्रेस हाईवे का काम लिया। देश में कुल 22 ग्रीन एक्सप्रेस हाईवे बना रहे हैं। अभी दिल्ली-मेरठ बनाया। दिल्ली से कटरा बना रहे हैं। दिल्ली से अमृतसर का सफर छह घंटे में हो जाएगा। वहां से कटरा का सफर ढाई घंटे में हो जाएगा। दिल्ली से देहरादून के लिए नया रोड बना रहे हैं, जिससे दो घंटे में पहुंच जाएंगे। इसके भी पैकेज अवार्ड हो गए हैं। दिल्ली से हरिद्वार का सफर दो घंटे में हो जाएगा। दिल्ली से चंडीगढ़ के सफर को भी दो घंटे करेंगे।

इतने सारे हाईवे, एक्सप्रेस हाईवे और ग्रीन सुपर एक्सप्रेस हाईवे की देश में कितनी जरूरत है?

‘अमेरिकन रोड्स आर नॉट गुड बिकॉज अमेरिका इज रीच, बट अमेरिका इस रीच बिकॉज अमेरिकन रोड्स आर गुड’। यह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन कैनेडी ने कहा था। सड़क से संवृद्धि और संपन्नता आती है। सड़क के अगल-बगल इंडस्ट्री आती है, टाउनशिप आते हैं। गांव स्मार्ट बनते हैं, उद्योग व व्यापार बढ़ता है।

देश में रोड ट्रांसपोर्ट के लिए आपका विजन क्या है और इसे कब तक हासिल कर लेंगे?

– विश्वास दिलाता हूं कि 2024 तक देश का रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर अमेरिका और यूरोपीय देशों की बराबरी का होगा।

राज्य हाईवे पर फास्टैग को लेकर क्या कहना है?

– फास्टैग के मामले में हम अभी 93 फीसद तक पहुंचे हैं। इसकी मदद से अब हर टोल बूथ का ट्रैक रिकार्ड हमारे पास है। राज्य हाईवे राज्य सरकारों का विषय हैं। हमने तो हमारा साफ्टवेयर और प्लेटफार्म फ्री में राज्यों को देने का ऑफर किया है। करना, नहीं करना उनका अधिकार है।

आपने सालभर बाद जीपीएस के माध्यम से टोल लेने की बात कही है। यह कैसे काम करेगा?

-हाईवे पर एंट्री के समय सेटेलाइट से जुड़े कैमरे होंगे। वहां जीपीएस में रिकार्ड हो जाएगा कि गाड़ी हाईवे पर आई है। बाहर निकलते समय भी कैमरे लगे होंगे। तय दूरी के हिसाब से पैसा कट जाएगा।

सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में कब तक सफलता मिलेगी?

– कई जगहों पर दुर्घटनाओं में कमी आई है। उम्मीद है कि 2024-25 से पहले ही इसमें 50 फीसद तक कमी ले आएंगे। पहले यह टारगेट 2030 का था। हम ब्लैक स्पॉट की पहचान कर रोड इंजीनिय¨रग की कमियां दूर कर रहे हैं। छोटी कारों में भी एयरबैग और दोपहिया चालकों के लिए हेलमेट को अनिवार्य किया है। इंटेलीजेंट ट्रैफिक सिस्टम ला रहे हैं। नया मोटर व्हीकल एक्ट भी इसी दिशा में कदम है।

इलेक्ट्रिक वाहनों के रास्ते में चार्जिंग स्टेशनों की कमी और अधिक कीमत पर आपका क्या कहना है?

– ऐसा नहीं है। इलेक्ट्रिक वाहन काफी लोकप्रिय हुए हैं। इनकी संख्या बढ़ रही है। पिछले हफ्ते ही अमेजन ने डिलीवरी के लिए 10 हजार इलेक्ट्रिक वाहन लिए हैं। धीरे-धीरे बड़े पैमाने पर ऐसे वाहन आ रहे हैं। आगे इनकी कीमतें भी कम होंगी।

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