12 ज्योतिर्लिंग में एक विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में भी कोरोना वायरस का डर अब स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति के लोगों को सता रहा है। कोरोना वायरस के खतरे को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति ने आज समस्त पंडे पुजारियों और पुरोहितों की बैठक के पश्चात मंदिर प्रशासक सुजान सिंह रावत ने पत्रकार वार्ता लेकर भस्मआरती के दौरान गर्भगृह में पूर्णतः प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है।
उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में मंदिर समिति द्वारा जिला प्रशासन को पत्र लिखे जाने के बाद आज दोपहर हुई पंडित पुजारी और पुरोहित के साथ बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया है कि अब से आगामी आदेश तक प्रतिदिन होने वाली बाबा महाकाल की भस्म आरती में गर्भगृह में समस्त श्रद्धालुओं का पूर्णतः प्रतिबंध रहेगा। प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती में अब सिर्फ पंडे और पुजारी ही मौजूद रहेंगे। पूरे विश्व सहित देश में कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए मंदिर समिति ने यह निर्णय लिया है। मंदिर समिति द्वारा और भी कई प्रकार के सुरक्षा के लिहाज से निर्णय लिए गए हैं, जिसमें मंदिर समिति के सुरक्षाकर्मियों द्वारा किसी भी श्रद्धालुओं को छूने के लिए मना किया गया है। साथ ही समस्त श्रद्धालुओं के सैनिटाइजर से हाथ धुलाए जाएंगे। कोरोना वायरस खतरे को देखते हुए मंदिर समिति के समस्त कर्मचारियों को मास्क सैनिटाइजर और ग्लब्स उपलब्ध कराए जाएंगे। भस्मआरती में प्रतिदिन 1500 से 1700 यात्री दर्शन के लिए आते हैं जो लगभग 2 घंटे मंदिर में रहते हैं इससे कोरोना वायरस के संक्रमण का ज्यादा खतरा होता है। इसीलिए आगामी आदेश तक गर्भ ग्रह में सभी का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा, साथ ही प्रतिदिन होने वाली प्रोटोकॉल दर्शन व्यवस्था भी बंद कर दी गई है। सुरक्षा के लिहाज से विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं से फॉर्मेट भरवा कर जानकारी ली जाएगी कि पिछले 6 माह के दौरान उन्होंने कहां-कहां विजिट की है।









