मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में आदिवासी अंचल की स्कूलों में छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर बेरोजगारी भारी पड़ रही है। काम की तलाश में जिले से बड़ी संख्या में पलायन कर चुके आदिवासी परिवार लंबे समय बाद वापस लौटे हैं। इसका साथ ही स्कूलों को छोड़ परिवार के साथ लंबे समय बाद वापस लौटे छात्र-छात्राओं का भविष्य भी दांव पर लग गया है। ऐसे में विश्रामपुर स्कूल की एक शिक्षिका ने शाला छोड़ परिवार के साथ पलायन कर वापस लौटे बच्चों को फिर शिक्षा की मुख्यधारा में लौटने का बीड़ा उठाया है।
ग्राम पंचायत टाकलखेड़ा की शासकीय प्राथमिक शाला विश्राम में कुल बच्चों की संख्या 25 है। इनमें आधे से ज्यादा बच्चे अपने माता-पिता के साथ काम की तलाश में शाला से पलायन कर गए थे। लंबे समय के बाद वे फिर गांव लौट है। इन्हें वापस शिक्षा की मुख्य धारा में लौटने के लिए शाला की शिक्षिका दीपा अनमोले ने बच्चों के माता पिता को काफी समझाईश के बाद इन्हें फिर से स्कूल भेजने के लिए न केवल मनाया बल्कि बच्चों को कोर्स कवर कराने के लिए अतिरिक्त मेहनत भी की। इस मामले में उन्होंने गांव वासियों की भी मदद ली। उधर पलायन करने वाले ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें ग्राम पंचायत से काम नहीं मिला। इसलिए उनके सामने काम की तलाश में पलायन करने के अलावा दूसरा रास्ता नही था। वे काम के लिए गांव से बाहर गए तो बच्चों को किसके भरोसे छोड़ते इसलिए वे बच्चों को भी अपने साथ अन्य गांव ले गए। काम से वापस गांव लौटने पर मेडम ने उन्हें समझाइश दी तो उन्होंने फिर से बच्चों को स्कूल भेजने शुरू कर दिया।
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