विरोध और देशभर में जमकर किरकिरी होने के बाद प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने नसबंदी को लेकर स्वास्थ्य कर्मचारियों को लेकर जारी किए गए फरमान को वापस ले लिया है।
फरमान में कहा गया था कि कम से कम एक सदस्य की नसबंदी कराना अनिवार्य है और ऐसा ना होने पर एक महिने का वेतन काटा जाएगा। साथ ही अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का भी प्रस्ताव बनेगा। जारी होते ही यह आदेश चर्चा का विषय बन गया था और सरकार की जमकर किरकिरी होने लगी थी। कर्मचारियों ने भी इसका विरोध किया था वही बीजेपी ने इसे आपातकाल पार्ट-2 बताया था। हालांकि यह पहला मौका नहीं है इसके पहले भी सरकार कई फैसलों पर यू-टर्न ले चुकी है। जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि किसी कर्मचारी की गलती से आदेश जारी हुआ था। कर्मचारियों पर कोई बाध्यता नही होगी। स्वास्थ्य मंत्री पूरे मामले की जानकारी ले रहे हैं। इधर, इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में मिशन संचालक छवि भारद्वाज को हटा दिया गया है,
आईटी कॉन्क्लेव-2025 में गूगल-माइक्रोसॉफ्ट करेंगी शिरकत:जीआईएस-2025 की घोषणाओं को निवेश में बदलने की पहल, 27 अप्रैल को होगा आयोजन
इंदौर में आयोजित होने वाले आईटी कॉन्क्लेव में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एनवीडिया जैसी बड़ी कंपनियां उपस्थिति दर्ज कराएंगी।मध्य प्रदेश सरकार का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग 27 अप्रैल को इंदौर के…









