प्रधानमंत्री ने कहा है कि बोडो समझौते ने पूर्वोत्तर में स्थाई शांति का रास्ता खोल दिया है। आज असम के कोकराझार में बोडो समझौते के बारे में आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह समझौता समूचे पूर्वोत्तर के लिए एक नई शुरूआत है। नार्थ-ईस्ट में शांति और विकास का नया अध्याय जुड़ना बहुत ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में और ये बहुत ही सुखद संयोग है कि जब देश महात्मा गांधी जी का 150वां जयंती वर्ष मना रहा हो तब इस ऐतिहासिक घटना की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है। और ये सिर्फ हिन्दुस्तान के लिए नहीं दुनिया के लिए हिंसा का रास्ता छोड़ कर के अहिंसा का रास्ता चुनने के लिए एक प्रेरणास्थली बनी है। प्रधानमंत्री के साथ असम के मुख्यमंत्री सर्बानन्द सोनोवाल और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी भी इस अवसर पर उपस्थित हैं। आपको बता दे कि त्रिपक्षीय बोडो समझौते पर पिछले महीने की 27 तारीख को केन्द्र, असम सरकार और प्रतिबंधित उग्रवादी गुट नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड की ओर से हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते का लक्ष्य असम के सबसे बड़े जनजातीय समूहों में से एक बोडो समुदाय को राजनीतिक और आर्थिक लाभ प्रदान करना है। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि बोडो शांति समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व और असम में शांति बहाली के प्रयासों का एक और प्रमाण है। शाह ने एक ट्वीट में कहा कि मोदी सरकार नई आशाओं का प्रतीक है।
40 मिनट में पूरा होगा 2 घंटे का सफर, NCR वालों को PM मोदी की सौगात, UER-II और द्वारका एक्सप्रेसवे का किया उद्घाटन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लगभग 11 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनी दो खास परियोजनाओं का उद्घाटन किया है। इससे दिल्ली और हरियाणा के अलावा नोएडा वालों को…









