धार में कल हुई दर्दनाक घटना ने कानून व्यवस्था पर सवालिया निषान खड़े कर दिए है। पुलिस मूक दर्षक बने पूरा तमाषा देखती रही, उधर उन्मादी भीड़ निर्दोष किसानों पर लाठी, डंडे और पत्थरों बरसाती रही। इस मामले को लेकर विपक्ष की प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी है। किसानों का पैसा खाकर बैठे धोखेबाज मजदूरों ने पहले किसानों को बकाया राषि का भुगतान देने के लिए गांव में बुलाया, फिर बच्चा चोर की अफवाह उड़ाई, इसके बाद भीड़ की आड़ में लाठी डंडे और पत्थर से अपनी दुष्मनी निकाली। माॅब लिंचिंग का यह प्रदेष का सबसे बड़ा मामला है। मामला धार के खड़किया गांव का है। बता दें कि धार, कुक्षी, टांडा के अधिकांष ग्रामीण इलाके ऐसे है जहां पुलिस भी जाने से घबराती है। अभी कुछ माह पूर्व ही इंदौर के एडिषनल एसपी षैलेंद्र सिंह चैहान और पुलिस की भारी भरकम फौज गाड़ियां भरकर यहां पर वाहन चोरों के गिरोह पर दबिष देने पहुंची थी।
मानवता को षर्मसार कर देने वाली घटना
धार में कल हुई इस घटना ने मानवता को षर्मसार कर दिया है। पैसे देने से बचने के लिए धोखेबाज मजदूरों ने उन्माद भीड़ की मदद से निर्दोष किसानों पर हमला कर दिया। किसान दया की भीख मांगते रहे लेकिन किसी को दया नहीं आई। किसानों के वहां पहुंचते ही किसी ने अफवाह उड़ा दी कि बच्चा चोर गिरोह है जिंदा मत छोड़ना। उसके बाद भीड़ के हाथ में जो आया किसानों को उससे मारा। मौके पर मौजूद केवल तीन पुलिसकर्मी भीड़ को समझाते रहे, लेकिन भीड़ किसी से नहीं सम्भली। भीड़ की मदद से अपनी रोटी सेंकने वाले दोषी कानून को भी कुछ नहीं समझ रहे थें। दस-दस लोग मिलकर एक-एक युवक को लाठी डंडे और पत्थरों से बेदर्दी से मार रहे थें। अस्पताल में घायल पड़े किसानों के साथ हुई मारपीट का यह वीडियो रोंगटे खड़े कर देने वाला है। पीड़ित किसानों ने मजदूरों को जो पैसा एडवांस दिया था वहीं लेने के लिए किसान उनके गांव में गए थें। पीड़ित किसानों को कुछ गड़बड़ी की भी आषंका थी। इसलिए उन्होंने थाने में षिकायत भी की थी। लेकिन निकम्मी पुलिस थाने में बैठकर सुस्ताती रही और इतना बड़ा कांड हो गया।
धार में हुए इस कांड की पूरे प्रदेष में निंदा हो रही है। उच्च पदों पर बैठे नेता मंत्री के बयान किसानों के जख्म पर मरहम का काम कर रहे है। उधर विपक्ष भी अपने बयानों से प्रदेष सरकार के नुमाइंदों को हाषिये पर ले रही है। मुद्दे को विधानसभा में उठाने की बात की जा रही है। बड़ा सवाल यह है कि मजदूरों को पैसे देना और काम नहीं करने पर पैसे वापस मांगना क्या इतना बड़ा गुनाह है।
मामले में एसपी आदित्य प्रताप सिंह का कहना है कि 2 गाड़ी में 6 किसान आए थे। किसानों ने मजदूरों को 50 हजार रुपये एडवांस दिए थे। लेकिन कुछ मजदूर काम किए बगैर पैसे लेकर भागकर वापस गांव आ गए थे। तिरला के खिड़कियां गांव में इन लोगों को बुलाया गया। इन पर पत्थरबाजी की गई और पीछा किया। फिर इनके बच्चा चोर होने की अफवाह फैलाई। बोरलाई गांव के हाट बाजार में 500 से ज्यादा की भीड़ ने उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। कार चालक 38 वर्षीय गणेश को बड़वानी रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। 45 साल के जगदीश राधेश्याम शर्मा, 42 साल के नरेंद्र सुंदरलाल शर्मा, 43 साल के विनोद तुलसीराम मुकाती, 38 साल के रवि पिता शंकरलाल पटेल और जगदीश पूनमचंद शर्मा को इलाज के लिए इंदौर लाया गया, रवि की हालत गंभीर है। पुलिस ने 3 आरोपी मजदूर अवतार सिंह, भुवनसिंह, जामसिंह की पहचान कर ली है। उनके साथ 15 से 20 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
प्रदेष में कानून व्यवस्था चरमरा गई है। लोगों में कानून का खौफ ही नहीं बचा है, जिसका जीता जागता उदाहरण है, यह उन्मादी भीड़। सनकी भीड़ एक एक को दौड़ा दौड़ा कर पीटती रही। अगर पीड़ित किसान भागते नहीं तो भीड़ कार के साथ साथ उन्हें भी जिंदा जला देती। भागकर बचना तो किसानों का तब भी मुष्किल हो गया था। भीड़ ने किसानों को कही से भी भागने का मौका नहीं दिया। दो गांव की भीड़ किसानों पर टूट पड़ी और उसके बाद जो हुआ वो बेहद चैंका देने वाला है।
तस्वीरों में आप देख सकते है कि बेकाबू भीड़ किस बेदर्दी से किसानों को मार रही है। किसान अपनी जान बचाते हुए इधर उधर भागते रहे लेकिन भीड़ में से किसी एक को भी दया नहीं आई। भीड़ में से कई लोग वीडियो बनाते रहे, लेकिन किसी ने भीड़ को रोकने की कोषिष नहीं की। पुलिसकर्मी के सामने भीड़ किसानों को पिटती रही, किसानों के वाहन फूंक दिए। बड़े-बड़े पत्थर किसानों पर बरसाएं गए। भीड़ से बचने के लिए किसान दुकान में घुस गए, लेकिन भीड़ ने दुकान का दरवाजा तोड़कर बाहर निकाला और उन्हें बुरी तरह पीटा।
किसानों के जख्म पर प्रषासन और मंत्रियों का मरहम
मनावर में कल हुई बेहद दर्दनाक घटना से पूरे प्रदेष में भूचाल सा आ गया है। इस मामले को लेकर विपक्ष भी मौजूदा सरकार और कानून व्यवस्था को हाषिये पर ले रहा है। मामले के बाद सभी की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी है। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने मनावर में हुई घटना को तालिबानी घटना बताया है। ट्विटर के जरिये गोपाल भार्गव ने कहा है कि षांति के टापू को कांग्रेस ने हिंसा का अड्डा बना दिया है। सरकार तत्काल ऐसी घटनाओं पर रोक लगाए। दोषी कोई भी हो उसे दंड दे।
माॅब लिंचिंग की घटना में घायल किसानों का इंदौर के चोइथराम अस्पताल में इलाज चल रहा है। उनका हाल जानने के लिए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तुलसीराम सिलावट अस्पताल पहुंचे। इस दौरान सिलावट ने मृतक के परिजनों के प्रति संवेदना जताई और घटना को दुखद बताया। उन्होंने मामले में जिम्मेदार व मारपीट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। मंत्री सिलावट ने मृतक गणेष पटेल के परिजनों को दो लाख का मुआवजा देने की भी घोषणा की है। घायलों से मिलने के लिए उच्च षिक्षा मंत्री जीतू पटवारी भी अस्पताल पहुंचे और पूरी मदद का आष्वासन दिया। जीतू पटवारी के साथ विधायक संजय षुक्ला, विधायक कुणाल चैधरी भी मौजूद रहे। मीडिया को दिए अपने बयान में जीतू पटवारी ने पूर्व मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान को भी घेरा है। जीतू पटवारी ने साफ कहा कि षिवराज जी राजनैतिक रोटियां सेंकना बंद करो। अस्पताल में भर्ती घायल किसानों से मिलने जीतू जिराती भी पहुंचे और हर तरह से मदद का आष्वासन दिया। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा कि वीडियो के आधार पर 40 से ज्यादा लोगों को चिन्हित किया गया है। मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया है। घायलों का इलाज सरकार करवाएगी। वहीं, खेल मंत्री जीतू पटवारी गुरुवार को उज्जैन जिले के लिंबी पिपलिया गांव पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। एसपी आदित्य प्रताप सिंह ने कहा कि मामले में सरपंच और भाजपा नेता रमेश जूनापानी, सत्या पिता तसल्लया, गलिया पिता भूरा निवासी भूतिया समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि हादसे के वक्त भाजपा सरपंच वहां उपस्थित थे और उन्होंने भीड़ को भड़काने का काम किया। इस मामले को लेकर प्रदेष के पूर्व मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान का भी बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने पुलिस प्रषासन पर और प्रदेष सरकार पर जमकर हमला बोला है।
इंदौर दौरे पर आए डीजीपी वीके सिंह ने माॅब लिंचिंग की घटना को दुखद और दुर्भाग्य पूर्ण बताया है। डीजीपी विवेक सिंह ने दोषी पुलिसकर्मी, मनावर थाना प्रभारी युवराज सिंह चैहान समेत पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इंदौर पहुंचे डीजीपी सिंह ने मीडिया से चर्चा में बताया कि हमें इस तरह की मानसिकता से बचना होगा, लेकिन वीडियो में यह भी देखा गया है कि भीड़ ने पुलिसकर्मियों के सामने भी मारपीट की है। हालांकि पुलिस की तमाम सीमाएं होती है, बावजूद इसके इस बात की तस्दीक की जा रही है कि क्या परिस्थिति थी कि पुलिस कर्मी शांत रहे, यदि लापरवाही पाई जाएगी तो कठोर कार्रवाई की जाएगी। डीजीपी वीके सिंह ने मौके पर मौजूद भीड़ को भी जिम्मेदार बताया, सिंह ने कहा की जो लोग भीड़ का हिस्सा बन कर वीडियो बना रहे थे उन्हें भी इस पर रोकथाम लगाना चाहिए था, भीड़ को नियंत्रित करना चाहिए था। वहीं मनावर माॅब लिंचिंग मामले में पुलिस ने भाजपा नेता और सरपंच रमेश जूनापानी को हिरासत में लिया है। एसपी आदित्य प्रताप सिंह ने इसकी पुष्टि की है। घटना के वक्त सरपंच रमेष जूनापानी मौके पर मौजूद था। रमेष पर भीड़ को उकसाने का आरोप है।












