मोदी सरकार के तीन सालों में गौरक्षा के नाम पर 44 लोगों की हत्या, मरने वालों में 36 मुस्लिम: ह्यूमन राइट वॉच

मोदी सरकार में बीते तीन सालों में कथित गौरक्षा के नाम पर 44 लोगों की हत्या कर दी गई है। यह दावा ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट में किया गया है। 104 पेज की रिपोर्ट में बताया गया है कि मारे गए लोगों में से 36 मुस्लिम समुदाय से थे। न्यूयॉर्क के समूह की इस रिपोर्ट में भारत में भीड़ द्वारा हिंसा को लेकर बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम मोदी 2014 में सत्ता में आए थे तब मई 2015 से दिसंबर 2018 के बीच, 12 राज्यों में कम से कम 44 लोग मारे गए हैं और 280 लोग घायल हुए हैं। हालांकि, रिपोर्ट में पुराने आंकड़ों या किसी समयावधि की तुलनात्मक जानकारी नहीं दी गई है।

ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि भारतीय सरकार को निगरानी समूहों द्वारा भीड़ हिंसा और कथित रूप से गौ रक्षा के नाम पर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने को रोकना चाहिए और मुकदमा करना चाहिए। रिपोर्ट में कहा है कि मोदी सरकार हिंदुओं द्वारा पूजे जाने वाली गाय की रक्षा के लिए नीतियों का समर्थन करती है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि गोरक्षकों के नाम पर हिंसा करने के आरोपियों के खिलाफ पुलिस अक्सर कार्रवाई करने में कोताही बरतती है, वहीं कई बीजेपी नेता सार्वजनिक तौर पर इन हमलों को जायज भी ठहराते हैं।

इस रिपोर्ट में बीजेपी नेताओ द्वारा गोमांस की खपत और मवेशी व्यापार से जुड़े लोगों के खिलाफ हिंसक निगरानी अभियान को प्रोत्साहन देने की बात कही गई है। ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा, “गौ रक्षा की अपील हिंदू वोटों को खींचने के लिए शुरू हुई, लेकिन यह भीड़ के लिए हिंसक हमले करने और अल्पसंख्यक समूह के सदस्यों की हत्या के लिए स्वतंत्र छूट में बदल गई।” इसमें कहा गया, “भारतीय प्रशासन को इन हमलों को सही ठहराने, पीड़ितों को दोष देना और अपराधियों को बचाना बंद करना चाहिए।”

रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह की हिंसा से दलित और आदिवासी भी पीड़ित हैं। एक मानवाधिकार कार्यकर्ता ने विदेशी मीडिया संगठन को बताया कि कई हत्याओं के वीडियो तक बनाए गए, जो बाद में वायरल हो गए।

बता दें कि पीएम मोदी खुद गोरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा का कई बार सार्वजनिक सभाओं से विरोध कर चुके हैं। पीएम ने कहा था कि गोरक्षा के नाम किसी भी तरह की हिंसा स्वीकार्य नहीं होगी। लेकिन उनके ही सरकार के कई मंत्री और नेता गाहे-बगाहे गो रक्षा के नाम पर हिंसा करने का समर्थन करते नजर आते हैं। वहीं गौरक्षा के नाम पर सुप्रीम कोर्ट भी केंद्र सरकार और राज्य सरकार को कई बार फटकार लगा चुकी है। वहीं इस तरह की हिंसा को रोकने के लिए राज्य सरकार को निर्देश भी दे चुकी है।

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