इस बार नवरात्रि 8 दिन की क्यों  है, जानिए वजह 

संपूर्ण ब्रह्मांड में शक्ति का संचार करने वाली और अपने भक्तों के कष्ट हरण करने वाली मां दुर्गा की आराधना का महापर्व ‘नवरात्र’ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ हुए हैं, जो नवमी तिथि (06 अप्रैल) को मां सिद्धिदात्री की पूजा-हवन के बाद संपन्न हो जाएंगे। दुर्गा अष्टमी का व्रत-पूजन 05 अप्रैल को रहेगा। तृतीया तिथि का क्षय होने के कारण इस बार नवरात्र आठ दिन के ही रहेंगे। इस वासंतिक महापर्व पर मां का आगमन हाथी पर होगा, जो जन-कल्याण के लिए परम हितकारी रहेगा। खेती-किसानी के लिए पर्याप्त वर्षा होगी।


कैसे करें पूजा

नवरात्र के प्रथम दिन स्नान आदि के उपरांत शुद्ध होकर कलश, नारियल-चुन्नी, शृंगार का सामान, अक्षत, हल्दी, फल-फूल, मिष्ठान्न आदि यथासंभव सामग्री साथ रख लें। कलश, सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का हो। उस पर रोली से ‘ॐ’ और स्वास्तिक बनाएं। पूजा आरंभ के समय ‘ऊं पुण्डरीकाक्षाय’ नमः कहते हुए कुशा से अपने ऊपर जल छिड़कें। अपने पूजा स्थल से दक्षिण-पूर्व के कोने में घी का दीपक ‘ॐ दीपो ज्योतिः परब्रह्म दीपो ज्योतिः जनार्दनः। दीपो हरतु में पापं पूजादीप नमोस्तु ते।।’ मंत्र बोलते हुए प्रज्ज्वलित करें। मां दुर्गा की मूर्ति की बाईं तरफ श्रीगणेश की मूर्ति रखें। पूजा स्थल के उत्तर-पूर्व भाग में पृथ्वी पर सात प्रकार के अनाज (सतनजा) अथवा नदी की रेत ‘ॐ भूम्यै नमः’ कहते हुए डालें। इसके उपरांत कलश में जल-गंगाजल, लौंग, इलायची, पान, सुपारी, रोली, मोली, चंदन, अक्षत, हल्दी, रुपया पुष्पादि डालें। कलश में थोड़ा और जल-गंगाजल डालते हुए ‘ॐ वरुणाय

नमः’ मंत्र बोलते हुए पूर्णरूप से भर दें। इसके बाद आम की टहनी (पल्लव) डालें। यदि आम की पल्लव न हो तो पीपल, बरगद, गूलर, पाकर का पल्लव भी कलश के ऊपर रखने का विधान है। जौ अथवा कच्चा चावल कटोरे मे भरकर कलश के ऊपर रखें। उसके ऊपर नारियल-चुन्नी रखकर कलश को माथे से लगाएं और वरुण देवता को प्रणाम करते हुए सतनजा पर स्थापित करें।

श्रद्धा-विश्वास

आराधना में इस बात का ध्यान रखें कि मां की पूर्णकृपा पाने के लिए श्रद्धा-विश्वास का होना अति आवश्यक है। यदि इन दोनों के साथ समर्पण भी है तो आपकी सभी विघ्न-बाधाएं दूर होंगी। पुष्प लेकर मन में ही संकल्प लें कि हे मां दुर्गा! मैं आज नवरात्र की प्रतिपदा से आपकी आराधना अमुक कार्य के लिए आरंभ कर रहा/रही हूं, मेरी पूजा स्वीकार करके ईष्ट कार्य को सिद्ध करें। पूजा के समय यदि आपको कोई मंत्र न आता हो तो केवल दुर्गा सप्तशती में दिए गए नवार्ण मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे।’ बोलते हुए सभी पूजन सामग्री चढाएं। मां का यह मंत्र अमोघ है, आपके पास यथासंभव जो भी सामग्री हो उसी से आराधना करें, लेकिन नारियल-चुन्नी अवश्य चढ़ाएं। पूजन के बाद आरती और क्षमा प्रार्थना करें।

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