संगम की रेती पर अखाड़ों का राजसी वैभव, तलवार-त्रिशूल लहराते पहुंचे नागा संन्यासी

अखाड़ों का राजसी वैभव मंगलवार को संगम की रेती पर उतर आया। हजारों साल पुरानी परंपरा के गवाह संगम घाट पर मौजूद श्रद्धालु भी बने। मकर संक्रांति के पुण्य काल में संन्यासी, वैरागी एवं उदासीन अखाड़ों के साधु-संत अस्त्र-शस्त्र के साथ रथों पर सवार होकर अमृत स्नान करने पहुंचे। पूरा संगम क्षेत्र हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से गूंजता रहा।परंपरा के मुताबिक सबसे पहले श्रीपंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के संत, आचार्य एवं पदाधिकारी स्नान के लिए पहुंचे। जुलूस के आगे चल रही धर्मध्वजा की तानियोें को अलग-अलग दिशाओं का संकेत देते हुए नागा संन्यासियों ने थाम रखा था। इसके साथ पालकी में अखाड़े के ईष्ट देव भगवान कपिल एवं आदि गणेश विराजमान होकर निकले। हजारों नागा संन्यासी भी हर-हर, बम-बम का उद्घोष करते उनके पीछे चले। जुलूस के साथ फूलों से सजे घोड़े एवं रथ में सवार अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर, महामंडेलश्वर समेत अन्य पदाधिकारी शामिल थे।

घाट पर सबसे पहले विधि विधान से धर्म ध्वजा समेत ईष्ट देव को स्नान कराया गया। इसके बाद अखाड़ा कोतवाल के हरी झंडी दिखाते ही डुबकी लगाने को आतुर नागा संन्यासियों की फौज संगम की ओर दौड़ पड़ी। निरंजनी अखाड़े के संत अपने ईष्ट भगवान कार्तिकेय की अगुवाई में निकले। उनके पीछे तीन भाल देव लेकर नागा संन्यासी चल रहे थे।

स्नान के बाद नागा संन्यासियों ने लपेटी भभूत
स्नान के बाद नागा संन्यासियों ने अपने पूरे शरीर पर भभूत लपेटी। कई नागा संन्यासियों ने स्नान के बाद घाट पर ही करतब करने लगे। इसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ भी जमा हो गई। कई नागाओं ने हठ योग क्रिया का प्रदर्शन किया। अक्सर गुस्से का पर्याय माने जाने वाले नागा संन्यासियों ने श्रद्धालुओं को खुले दिल से आशीष भी दिया।

संगम नोज पर हर घंटे में तीन लाख से अधिक ने किया स्नान
संगम नोज पर मंगलवार को हर घंटे में तीन लाख से अधिक लोगों ने स्नान ने किया। 13 जनवरी से शुरू हुए स्नान पर्व में श्रद्धालुओं की सबसे अधिक संख्या संगम नोज पर ही पहुंच रही है। 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा और 14 जनवरी को पहले अमृत स्नान पर चार करोड़ से ज्यादा लोगों ने डुबकी लगाई। इसमें सर्वाधिक लोगों ने संगम नोज पर ही स्नान को प्राथमिकता दी।
बैराज यांत्रिक खंड अनुरक्षण वाराणसी ने 85 दिनों तक संगम नोज पर 26 हेक्टेयर क्षेत्र का विस्तार किया है। इससे 1650 मीटर क्षेत्र में बालू की बोरी लगाकर अस्थायी घाटों का निर्माण संभव हो सका।
संगम तट पर कबीर पंथी भी पहुंचे
अमृत स्नान के दौरान कबीर पंथी भी संगम तट पहुंचे। करीब दो दर्जन से अधिक कबीर पंथी जूना अखाड़े के साथ स्नान करने पहुंचे थे। समूह में शामिल सदस्य कबीर वाणी दोहराते चल रहे थे। अपने आकर्षक पहनावे की वजह से कबीर पंथी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बने रहे। जूना अखाड़े के साथ कबीर पंथी उनके वचनों को दोहराते हुए उनके साथ स्नान करने पहुंचे।

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