MP में महिला गेस्ट टीचर चुकाती हैं बड़ी कीमत! मां बनने पर नहीं मिलती है एक दिन की भी छुट्टी, जाती है नौकरी

मध्यप्रदेश में महिला अतिथि शिक्षिकाओं को मातृत्व अवकाश का अधिकार नहीं है. ये हम नहीं कह रहे है. दरअसल, राज्य शिक्षा केंद्र के अधिकारियों ने ये बात स्पष्ट की है कि महिला अतिथि शिक्षिकाओं के लिए मातृत्व अवकाश का कोई प्रावधान नहीं है. ऐसे में महिलाएं नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर हो जाती हैं, या उन्हें नौकरी से बिना बताए निकाल दिया जा रहा है. कई परिवार इस कारण आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं. हालात ये है कि सरकारी पॉलिसी की मार झेल रही कई शिक्षिकाएं मजबूर होकर घर पर बैठी हैं.

छट्टू लेने पर चली गई नौकरी
शाजापुर की रहने वाली प्रिया अतिथि शिक्षक थीं. मां बनने पर उन्होंने छुट्टी ली, फिर कभी पढ़ा नहीं पाईं. बाकायदा, उनका नाम तक अतिथि शिक्षक के पोर्टल से हटा दिया गया. प्रिया ने बताया कि मैं प्रेगनेंट हुई तब कहा कि आप जॉब करते रहिए. कोई नियम होगा, तो हम देख लेंगे. इस बीच जब मेरी बेटी का जन्म हुआ, तो मुझे जॉब छोड़नी पड़ी है. हालांकि, मैं नौकरी छोड़ना नहीं चाहती थी. स्कूल वालों ने भी यही बोला था कि कुछ एक्शन लिया जाएगा, तो आपको जानकारी दी जाएगी. इसके बाद प्रिया बताती है कि न तो मुझे जानकारी दी कई न सहमति ली गई और अचानक ही पोर्टल से मेरा नाम हटा दिया गया. इस मामले में जब स्कूल प्रबंधन से बात की तो कहा गया कि अगले सत्र में आपको रख लेंगे, जब अगला सत्र आया, तो मुझे नहीं रखा गया. अगले क्रम वालों को बुला लिया गया. जब मैंने शिकायत की, तो उन्होंने कहा कि अतिथि शिक्षिकाओं के लिए मातृत्व अवकाश का कोई नियम नहीं है. इसके बाद दोबारा से पोस्टिंग मिलना मुश्किल हो गया. प्रिया कहती है कि मैं निम्न मध्यम वर्गीय परिवार से आती हूं, मुझे बहुत परेशानी होती है, क्योंकि दो साल से मेरे पास नौकरी नहीं है.

डॉक्टर के कहने के बाद भी नहीं मिल रही है छट्टी

जगदीश परमार की बहू सरकारी स्कूल में अतिथि शिक्षक हैं. पहले गर्भवती हुई थीं, लेकिन अचानक गर्भपात हो गया, फिर गर्भवती हैं . ऐसे में डॉक्टर छुट्टी लेने के लिए कह रहे हैं, लेकिन छुट्टी नहीं मिल रही है. नियम ये है कि स्थाई शिक्षक जब छुट्टी पर जाते है, तो अतिथि शिक्षकों को भर्ती किया जाता है. सरकारी महिला शिक्षकों को 180 दिनों के मातृत्व अवकाश का प्रावधान है, लेकिन जब ये महिला शिक्षकाएं छुट्टी पर रहती हैं, तो उनकी जगह जिन शिक्षिकाओं को भर्ती किया जाता है, उन्हें छुट्टी का अधिकार नहीं है. अगर कोई छुट्टी ले लेतीं हैं तो एक-एक दिन के पैसे सैलरी से काट लिए जाते हैं. कई महीनों पहले एक बैठक में अतिथियों की छुट्टी को लेकर चर्चा तो हुई, लेकिन अब तक कुछ भी फैसला ना हो सका है.

कही नहीं हो रही है सुनवाई

अतिथि शिक्षक संगठन के प्रदेश सचिव रविकांत गुप्ता बताते हैं कि हमें किसी भी तरह की छुट्टियां नहीं दी जाती हैं. चाहे हमारी तबीयत ख़राब ही क्यों न हो. अगर हम स्कूल जाएंगे तभी हमें पैसा मिलेगा. इस संबंध में फ़रवरी 224 में एक बैठक भी हुई थी, जिसमें ये तय किया गया था कि तेरा छुट्टियां और प्रसूति महिलाओं को छह महीने का अवकाश दिया जाए, लेकिन उसके पास कोई आदेश जारी नहीं किया गया. हम मंत्री से लेकर अधिकारियों तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कहीं पर भी कोई हमारी नहीं सुनता है.

कॉलेजों की महिला अतिथि विद्वान को बगैर तनख्वाह के मिलती है छुट्टी

साल 2018 में आदेश जारी किया गया था कि  सरकारी कॉलेजों में पढ़ा रही महिला अतिथि विद्वान बगैर तनख्वाह के मातृत्व अवकाश की हकदार होंगी, लेकिन आज के दिन तक स्कूल के अतिथि शिक्षकों को ये अधिकार नहीं मिल पाया है. राज्य शिक्षा केंद्र के अधिकारी कहते है कि छुट्टी देने का प्रावधान कहीं नहीं है.

अफसर को है नियम की दरकार

भोपाल के जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र अहिरवार से जब बातचीत की, तो उन्होंने कहा कि हमने कई जगहों से नियम पता करने की कोशिश की है, लेकिन कहीं पर भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. हालांकि, हमारे पास अभी तक ऐसी कोई भी शिकायत नहीं आई है, लेकिन अतिथि शिक्षक को इस तरह से छुट्टी नहीं दी जाती है. हमने उच्चाधिकारियों से भी बातचीत की है और पता करने की कोशिश की है. इस बारे में आने वाले समय में क्या फैसला होता है, ज़रूर बताया जाएगा.

सामाजिक कार्यकर्ता मीता वाधवा कहती है कि सरकार ने रेगुलर एंप्लॉयीज के लिए तो बहुत अच्छे प्रावधान किए हैं, लेकिन ये बात समझ से पड़े है कि अतिथि शिक्षकों के साथ ऐसा क्यों किया जा रहा है. वे आगे कहती है कि महिला तो महिला है. दर्द तो उस महिला को भी होता है और इस महिला को भी होता है, लेकिन ये बहुत आश्चर्य की बात है कि अतिथि शिक्षकों को या तो नौकरी छोड़नी पड़ रही है या फिर ये बोल दिया जा रहा है कि हम छुट्टी नहीं दे सकते हैं. सरकार के इस फैसले का महिलाओं की मानसिक और शरीर की दोनों ही स्थिति पर असर पड़ता है. ये बहुत ग़लत है. लिहाजा, सरकार इन अतिथि शिक्षकों को होने वाली परेशानी पर एक बार फिर से सोच विचार करना चाहिए.

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