पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा ,विधानसभा चुनावों होने है. इसको लेकर आचार संहिता लागू( Model Code of Conduct)की जा चुकी है. संविधान के तहत आचार संहिता में क्या प्रावधान लागू होंगे. इसको लेकर एक्सपर्ट बताते हैं कि संविधान के तहत प्रशासनिक अधिकारियों के पास शक्तियां आ जाएगी और वह संविधान के तहत चुनाव कराएगी.
इसके साथ ही राजनीतिक पार्टियों के क्षेत्राधिकार में कमी आएगी. एक्सपर्ट एडवोकेट विवेक नंदवाना ने कहा कि संविधान के तहत चुनाव में सभी शक्तियां प्रशासनिक अधिकारियों के पास होगी. जबकि जनहित के कार्य नहीं रुकेंगे और जो योजनाएं पूर्व में लागू की जा चुकी हैं, जिन कार्यों के टेंडर हो चुके हैं वह वह प्रभावित नहीं होंगे. उन्होंने कहा विशेष परिस्थितियों में किसी कार्य को किया जाना अनिवार्य है तो वह चुनाव आयोग की परमिशन से किया जा सकेगा.
अब मतदाता को नहीं लुभा सकते योजनाओं से
उन्होंने कहा कि आचार संहिता लागू होने के बाद मतदाता को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं किया जा सकता. उसे लोभ लालच नहीं दिया जा सकता. सरकार कोई भी जन कल्याणकारी योजना लागू नहीं कर सकती. लेकिन कोई वर्क आर्डर और योजनाएं पहले से चल रही है तो उन्हें नहीं रोका जा सकता है. वहीं दूसरी और राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों के ऊपर भी फर्क पड़ेगा. वह प्रशासनिक निर्णय नहीं रह सकते, आदेश प्रशासनिक अधिकारियों पर उनके अब लागू नहीं होंगे.
जन प्रतिनिधियों की प्रशासनिक सुविधाओं में आएगी कमी
आचार संहिता में जनप्रतिनिधि और मिनिस्टर की प्रशासनिक सुविधाओं में कमी की जा सकती है. एस्कॉर्ट जरूरी हो चुनाव आयोग की अनुमति से दी जा सकती है. इसके अलावा जो उनके कार्यालय हैं वहां भी वह कार्य नहीं कर सकते. जो नियम है उन्हीं के तहत संविधान के नियम के तहत ही वह आ जा सकेंगे. कुल मिलाकर के आचार संहिता में मतदाता को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं कर सकते.
चुनाव आयोग की गाइडलाइन में अधिकारी करेंगे कार्य
निर्वाचन विभाग की गाइडलाइन में सभी प्रशासनिक अधिकारी कार्य करेंगे और किसी भी तरह से प्रशासनिक अधिकारी भी राजनीतिक तौर पर किसी को लाभ या हानि नहीं पहुंचा सकते हैं. यदि ट्रांसफर करना जरूरी है तो वह भी चुनाव आयोग की अनुमति से कर सकते है. निर्वाचन अधिकारी इसमें सर्वेसर्वा रहेगा.
चुनाव आयोग की अनुमति से होंगे ट्रांसफर
आचार संहिता लागू होने के बाद किसी भी सरकारी अधिकारी, कर्मचारी की ट्रांसफर पोस्टिंग सरकार नहीं कर सकती है. ट्रांसफर करना बेहद जरूरी हो गया हो तब भी सरकार बिना चुनाव आयोग की सहमति के ये फैसला नहीं ले सकती है. इस दौरान राज्य के मुख्य चुनाव आयुक्त जरूरत के हिसाब से अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग कर सकते हैं.
सरकारी योजनाओं के बैनर पोस्टर हट जाएंगे
आदर्श आचरण संहिता लागू होते ही किसी भी सरकारी संपत्ति पर दीवार लेखन, होर्डिंग्स, बैनर, पोस्टर, पेंटिंग को हटाने की कार्रवाई 24 घंटे, सार्वजनिक स्थल के लिए 48 घंटे और निजी संपत्ति पर 72 घंटे में एक्शन लेना होता है और इसके लिए कार्य शुरू भी कर दिया गया है. इसके साथ ही कानून व्यवस्था और सुरक्षा की जानकारी भी चुनाव आयोग को देनी होती है. मतदाता जागरूकता कार्यक्रम के तहत इस्तेमाल हो रही सभी ईवीएम को आचार संहिता लागू होते ही स्ट्रांग रूम में जमा करना होगा.









