प्रदेश के 70 हजार बिजली कर्मी एस्मा लागू होने के बावजूद हड़ताल पर, बढ़ेगी परेशानी

प्रदेश के 70 हजार बिजली कर्मचारियों ने शुक्रवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। सरकार द्वारा हड़ताल को रोकने के लिए एस्मा लागू करने के बाद भी कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हैं।

बिजली कर्मचारियों ने आठ सूत्रीय मांगों को लेकर यह हड़ताल शुरू की है। कर्मचारियों ने गुरुवार को सभी जिला कलेक्टरों को हड़ताल पर जाने का नोटिस दिया था। इसको देखते हुए सरकार ने गुरुवार को ऊर्जा विभाग के अंतर्गत काम करने वाली सभी छह विद्युत कंपनियों के कर्मचारियों को हड़ताल से रोकने के लिए अत्यावश्यक सेवा प्रबंधन कानून (एस्मा) तीन माह के लिए लागू कर दिया है। लेकिन, इसकी परवाह नहीं करते हुए कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने बताया कि दो अक्तूबर को हमने सरकार को हमारी मांगों को लेकर अल्टीमेटम दिया था। इसके बाद पांच अक्तूबर को हमारी सरकार से चार बार बातचीत हुई, लेकिन सरकार ने समाधान का कोई रास्ता नहीं निकाला। इसके बाद हमें मजबूर होकर हड़ताल पर जाने को विवश होना पड़ा। उन्होंने कहा कि हमारी मांगे पूरी नहीं होने तक हड़ताल जारी रहेंगी। वहीं, हड़ताल को लेकर ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे ने कहा कि हमारी कर्मचारियों से बातचीत चल रही है। जल्द ही समाधान हो जाएगा।

हड़ताल से 900 शिकायतें पेंडिंग
मध्य प्रदेश बिजली को लेकर तीन संभाग भोपाल, इंदौर और जबलपुर बंटा है। भोपाल संभाग में पहले ही दिन घरेलू बिजली की करीब 900 शिकायतें आईं, जो कई घंटों से पेंडिंग है। बिजली कर्मचारियों ने बताया कि पहले दिन हड़ताल के कारण रीडिंग का काम रूक गया, नए कनेक्शन नहीं लग रहे और राजस्व वसूली ठप हो गई है। बिजली के ऑफिस और कार्यालय बंद हैं।

जनरेशन प्लांट कर्मियों ने भी दिए नोटिस
जानकारी के अनुसार सारणी, वीरसिंहपुर, चचाई समेत अन्य जनरेशन प्लांट पर कर्मचारी हड़ताल के चलते 24 घंटे काम कर रहे हैं। उनकी शिफ्ट खत्म होने के बावजूद उनको लगातार काम करना पड़ रहा है। उन्होंने अपने प्रबंधन को नोटिस दिया है कि लगातार काम करने से उनका मानसिक दबाव बढ़ रहा है। यदि जनरेशन यूनिट ट्रीप होती है तो उसकी जिम्मेदार हम नहीं होंगे। इससे प्रदेश में ब्लैकआउट की आशंका भी बढ़ रही है।

बिजली कर्मचारियों की मांगें
सातवें वेतनमान में तीन स्टार मैट्रिक्स को विलोपित किया जाए।
पेंशन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
डीआरके आदेश, चतुर्थ वेतनमान के आदेश, संविदा का नियमितिकरण एवं सुधार के बाद वर्ष 2023 संविदा नीति लागू करें।
आउटसोर्स की वेतन वृद्धि के साथ 20 लाख का दुर्घटना बीमा एवं तीन हजार जोखिम भत्ता दें।
कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर कर मूल वेतन 25 हजार 300 रुपये से अधिक किया जाए।
वर्ष 2018 के बाद के कनिष्ठ अभियंताओं की वेतन विसंगति दूर की जाए।
उच्च शिक्षा प्राप्त कनिष्ठ अभियंताओं को सहायक अभियंता एवं कर्मचारियों को कनिष्ठ अभियंता की नियुक्ति हेतु नीति बनाई जाए।
ट्रांसमिशन में आईटीआई कर्मचारियों को चतुर्थ श्रेणी की जगह तृतीय श्रेणी में रखा जाए।

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